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Interview: उमर साहब जीतने के लिए लड़ रहे...हमें मां-बाप को जेल से छुड़वाना है; खास बातचीत में बोलीं सुगरा

Tue, 17 Sep 2024 10:31 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 17 Sep 2024 10:31 AM IST
सार

उमर अब्दुल्ला के सामने गांदरबल से लड़ रहे अलगाववादी नेता बरकती की लड़ाई 17 साल की बेटी सुगरा लड़ रहीं। अमर उजाला से खास बातचीत में वो कहती हैं कि उमर साहब जीतने के लिए लड़ रहे... हमें मां-बाप के जेल से छुड़वाना है।

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jammu Omar is fighting to win we have to get our parents released from jail says daughter of Hurriyat leader
Sugar Barkati - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुगरा की उम्र 17 साल है। फिलहाल उसको वोट डालने का जायज हक नहीं मिला है, लेकिन अपने अब्बा को वोट दिलवाने की कमान अपने हाथ ले ली है। वह हुर्रियत नेता सरजन बरकती की बेटी हैं। वही बरकती, जिसने हिजबुल के आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद साउथ कश्मीर में सैंकड़ों पत्थरबाजों और लाखों युवाओं के साथ हिंसक आंदोलन चलाया था। 
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सरजन को साउथ कश्मीर में फ्रीडम चाचा, पाइप्ड पाइपर ऑफ कश्मीर बुलाया जाने लगा। आजादी के लिए नारेबाजी वाले बरकती के वीडियो कश्मीर में खूब वायरल हुए। अब 37 साल बाद कोई अलगाववादी नेता लोकतंत्र का हवाला देते चुनाव लड़ने जा रहा है। 
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चुनाव इसलिए खास है, क्योंकि बरकती के सामने पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला हैं। बरकती पर 30 से ज्यादा केस हैं, पीएसए लगाया जा चुका है, आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा जुटाने के आरोप है। पत्नी शबरोजा भी जेल में है। घर पर बेटी सुगरा और 14 साल का बेटा अजान हैं। 
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अब्बा के चुनाव के स्टार प्रचारक भी हैं और शायद रणनीतिकार भी। सुगरा कहती हैं, उमर अब्दुल्ला को सीट जीतनी है, लेकिन मुझे मां-बाप को जेल से छुड़वाना है। सुगरा से उपमिता वाजपेयी ने कई मुद्दों पर बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश...

अब्बा, मां जेल में हैं, चुनाव लड़ने का फैसला कैसे लिया?
2016 के बाद बार-बार अब्बा को जेल में डाला गया। डेढ़ साल से स्टेट इंवेस्टिगेटिव एजेंसी ने जेल में डाला है। अम्मी भी जेल में हैं। चुनाव लड़ने का फैसला मेरा था। मैं चुनाव के जरिये सिर्फ अब्बा और अम्मी की रिहाई की बात नहीं, बल्कि कश्मीर की जेलों में बंद नौजवानों की रिहाई की बात कर रही हूं। इसलिए लड़ने का फैसला किया। पहले सिर्फ बाबा जेल में थे, तो नहीं सोचा यह सब, लेकिन जब अम्मी भी जेल गईं, तो हमारी पढ़ाई बंद हो गई।

आप साउथ कश्मीर से हैं, तो नॉर्थ कश्मीर जाकर उमर अब्दुल्ला के खिलाफ लड़ने का क्यों सोचा?
उमर साहब बोल रहे हैं कि भाजपा या सरकार ने हमारे बाबा को उनके खिलाफ खड़ा किया। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उमर साहब के खिलाफ जो लड़ रहा है, वह सरकार से जुड़ा है। क्या उनके खिलाफ लड़ने का हक किसी को नहीं है। जीतेंगे तो उन्हें सीट मिलेगी, लेकिन हमें हमारे मां-बाप मिल जाएंगे। हमने साउथ कश्मीर से फॉर्म भरा था, लेकिन रिजेक्ट हो गया। गांदरबल और बीरवाह से इसलिए भरा, क्योंकि 2016 में जब मेरे बाबा ने प्रोटेस्ट किया तो कश्मीर का बच्चा-बच्चा हमारे घर आया। बोले-आप बस आ जाओ, चुनाव हम संभाल लेंगे। मैं बाबा से जेल में मिलने और पूछा की जब साउथ कश्मीर से रिजेक्ट हुआ तो हम क्यों न वहां जाएं, जहां से ज्यादा सपोर्ट मिल रहा है। हर नागरिक का हक है, वह कहीं से भी लड़ सकता है।
 

घर चलाना कठिन है, चुनाव कैसे मैनेज करेंगी?
मुझे कश्मीर के नौजवानों पर भरोसा है। वे मेरा साथ देंगे। अभी मैं बीरवाह गई भी नहीं हूं और वहां से वीडियो आ रहे हैं, लोग पोस्टर बना रहे हैं। गांदरबल से लोग फोन कर रहे हैं, आपको सिर्फ आगे आगे जाना है, हम पीछे साथ चलेंगे। हमें सीट नहीं चाहिए, हमें बाबा की जरूरत है।

आपके बाबा ने नौजवानों के लिए ऐसा क्या किया जो वो आपके साथ लड़ रहे हैं?
बाबा ने हमें छोड़कर कश्मीर का साथ दिया। जेल में बंद रहे। कौम के लिए। कश्मीरी कौम के लिए। साढ़े चार साल। उस वक्त कश्मीरी मेरे बाबा के साथ थे।

कैसे प्रचार करेंगी, आप वोट तक नहीं दे सकतीं, 14 साल का भाई कैसे तकरीर देगा?
मैं 2016 से मां-बाप को देख रही हूं, कहां क्या बात करना है, मुझे पता है। मुझे हमारे ऊपर हुए जुल्म ही बयां करना है, बोलने में क्या डर। एक दिन अजान मेरा भाई जाएगा, एक दिन मैं जाऊंगी। मेरा नारा यही होगा, जुल्म का बदला वोट से, यतीमों का बदला वोट से, जुदाई का बदला वोट से, मां बाप का बदला वोट से….। मैंने तराने बनाए हैं, खुद लिखे हैं। भाई अजान के जहन पर बस एक बात डाली जो हमारे साथ हुआ वो लोगों को बोल देना। कश्मीरी कौम समझेगा हमें।

मैं जज बनना चाहती हूं, पर पढ़ाई छोड़नी पड़ी। मेरा भाई छोटा है, पढ़ रहा है। कोर्ट में मां-बाप की रिहाई के लिए खुद जाती थी। मुलाकात के लिए जाती तो एक दरवाजे से बाबा वापस जाते थे दूसरे से अम्मी। वह मुश्किल वक्त था। मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन होता था वो। -सुगरा बरकती
 

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