उमर ने अफ्स्पा मुद्दे पर मोदी पर साधा निशाना
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घाटी में काफी समय से शांत पड़ा आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफ्स्पा) का मुद्दा फिर गर्माने लगा है। अफ्स्पा के मुखर विरोधी रहे रियासत के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर इसको लेकर पुराना सुर छेड़ दिया है।
उन्होंने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उम्मीद है मोदी सरकार वादी के लोगों की भावनाओं को समझेगी। हालांकि उमर के इस बयान को राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
जो एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को हवा देकर चुनावी मुद्दा बनाने की ताक में हैं। दूसरी ओर उमर के इस रुख से काफी दिनों से उपेक्षित चल रहे घाटी के अलगाववादी संगठनों को फिर एक मुद्दा मिल सकता है।
चुनाव आते देख उमर ने फेंका सियासी पासा
घाटी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दीवाली मनाने की बात सामने आते ही बाढ़ के कारण काफी दिनों से ठंडी पड़ी रियासत की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है।
जहां आम घाटी वासी इसे अपने लिए एक मौके के तौर पर देख रहा है वहीं राजनीतिक दलों ने भी इससे अपने अपने हित साधने शुरू कर दिए हैं। सूबे के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नरेन्द्र मोदी के श्रीनगर आने से पूर्व ही एक बार फिर काफी संवेदनशील मुद्दे आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफ्स्पा) पर पुराना राग छेड़कर प्रधानमंत्री पर सियासी दबाव बनाने का प्रयास किया है।
उमर जानते हैं कि मोदी की घाटी में आकर दीवाली मनाने के पीछे लोगों को खुद से भावनात्मक रूप से जोड़ने की मंशा है और इसी का वह फायदा उठाना चाहते हैं, क्योंकि वादी के एक तबके और राजनीतिक हल्के खासकर अलगाववादी संगठनों में अफ्स्पा को लेकर विरोध का माहौल रहा है।
अलगाववादी संगठन उठा सकते हैं फायदा
यही कारण है कि जब तब इसका विरोध भी होता रहा है। इसी संवदेनशील मुद्दे को दोबारा उछालते हुए उमर ने कहा कि उम्मीद है प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफ्स्पा) पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे।
उन्होंने यह कहकर और दबाव बनाने का प्रयास किया कि यह "यह अब इस पर आगे बढ़ने का सही समय है', पिछले कुछ माह में क्या हुआ वह छोड़ दें। लेकिन अब उम्मीद है कि मोदी सरकार अफ्स्पा के मामले में गंभीर फैसला लेगी।"
गौरतलब है कि अफ्स्पा को लेकर सबसे ज्यादा मुखर विरोध अलगाववादी संगठन करते रहे हैं, इसको लेकर पाक परस्त ये संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन भी करते रहे हैं। ऐसे में उमर ने एक बार फिर इस संवदेनशील मुद्दे को हवा देकर अलगाववादी संगठनों को फिर एक मौका दे दिया।
दूसरी ओर राजनीति के जानकार उमर के इस बयान को आगामी चुनावों से भी जोड़कर देखते हैं। जिससे उमर चुनावों में सियासी फायदा उठाने की उम्मीद भी देखते हैं।