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'नहीं टूटने वाला सिंधु जल समझौता, मैं अपनी गर्दन दांव पर लगाने को तैयार'
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 24 Sep 2016 12:17 AM IST
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नेकां प्रमुख उमर अब्दुल्ला
- फोटो : Amar Ujala
पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार सिंधु जल समझौते को नहीं तोड़ेगी। उमर ने ट्वीट कर कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच चार युद्ध होने के बावजूद सिंधु जल समझौता नहीं टूटा।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पारित किया। इस सब के बावजूद सिंधु जल समझौता आज तक बना हुआ है। ऐसे में वह अपनी गर्दन तक दांव पर लगाने को तैयार हैं। उमर ने कहा वह दावे के साथ कह सकते हैं कि सरकार समझौता तोड़ने वाली नहीं।
उमर ने कहा जम्मू-कश्मीर को इस समझौते से व्यापक नुकसान झेलना पड़ा है। लेकिन, सरकार ने समझौते की समीक्षा में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पारित किया। इस सब के बावजूद सिंधु जल समझौता आज तक बना हुआ है। ऐसे में वह अपनी गर्दन तक दांव पर लगाने को तैयार हैं। उमर ने कहा वह दावे के साथ कह सकते हैं कि सरकार समझौता तोड़ने वाली नहीं।
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उमर ने कहा जम्मू-कश्मीर को इस समझौते से व्यापक नुकसान झेलना पड़ा है। लेकिन, सरकार ने समझौते की समीक्षा में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई।
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
- फोटो : File Photo
वर्तमान में एनडीए सरकार ने समझौते को खत्म करने के संकेत भले दिए हैं लेकिन वह दावे के साथ कह सकते हैं समझौता यथावत कायम रहने वाला है।
उल्लेखनीय है कि भारत की ओर से सहयोग और विश्वास के आधार का हवाला देकर सिंधु जल समझौता तोड़ने का संकेत दिया गया है। उड़ी में सैन्य शिविर पर हमले के बाद उपजे हालात में सिंधु जल समझौते को लेकर बयान सामने आए हैं।
सिंधु नदी समझौता पाकिस्तान के लिए काफी महत्व रखता है जिसके तहत पडोसी मुल्क को इस ऐतिहासिक नदी का 80 फीसदी तक पानी मिलता है। साफ है अगर भारत इस समझौते को रद करता है तो पाकिस्तान बूंद बूंद पानी के लिए तरस जाएगा।
उल्लेखनीय है कि भारत की ओर से सहयोग और विश्वास के आधार का हवाला देकर सिंधु जल समझौता तोड़ने का संकेत दिया गया है। उड़ी में सैन्य शिविर पर हमले के बाद उपजे हालात में सिंधु जल समझौते को लेकर बयान सामने आए हैं।
सिंधु नदी समझौता पाकिस्तान के लिए काफी महत्व रखता है जिसके तहत पडोसी मुल्क को इस ऐतिहासिक नदी का 80 फीसदी तक पानी मिलता है। साफ है अगर भारत इस समझौते को रद करता है तो पाकिस्तान बूंद बूंद पानी के लिए तरस जाएगा।