ग्राउंड रिपोर्टः आतंक का गढ़ रहे किश्तवाड़ में अब विकास की बयार
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कश्मीर के अनंतनाग, हिमाचल और लद्दाख से जुड़े किश्तवाड़ में अब वर्षों से लटकी बिजली परियोजनाएं धरातल पर उतरने लगी हैं। जिले में पक्कल डूल, क्वाड़ और कीरू प्रोजेक्टों का काम शुरू हो चुका है। निजाम बदलने के बाद चिनाब नदी पर प्रस्तावित 850 मेगावाट की रैटले पन बिजली परियोजना का रास्ता भी साफ हो गया है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधरेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
कोरोना महामारी के चलते बेशक विकास कार्य थम गए थे, लेकिन एक साल के दौरान किश्तवाड़ की तस्वीर बदलती दिख रही है। पाडर इलाके में मचेल मंदिर के लिए सड़क का काम जोरों से चल रहा है। बटोत-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे की हालत भी सुधर गई है। पॉलिटेक्निक कॉलेज, डिग्री कॉलेज, यूनिवर्सिटी कैंपस और अस्पताल की इमारतों का कार्य भी शुरू हो गया है।
पहले आतंकी घटनाओं से सहमे रहते थे। मगर अब ऐसा नहीं है। लोग विकास और रोजगार चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से विकास की उम्मीद जगी है। खुशी है कि रैटले पावर प्रोजेक्ट का जल्दी काम शुरू होगा। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा।
-मुदस्सर अहमद, सरूड़
हमें शांति चाहिए। परियोजनाएं आने से रोजगार के साथ द्रवशाला में कारोबार भी बढ़ेगा। अब उस घुटन से आजादी मिली है। क्षेत्र में विकास की दरकार है। एक साल से कई प्रोजेक्टों पर काम शुरू हुआ है। लोगों को काफी उम्मीदें हैं।
-सुनील कुमार, द्रवशाला
जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से इलाके में विकास के काम आरंभ हुए हैं। दूरदराज के गांवों में पेयजल पहुंचाने के लिए जलशक्ति विभाग के काम में भी तेजी आई है। कुछ सड़कों का निर्माण शुरू हुआ है।
-मोहम्मद सलीम, सरूड़
रैटले प्रोजेक्ट पर कुछ वर्ष पहले काम आरंभ हुआ था मगर राजनीतिक कारणों के बंद हो गया था। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद फिर काम शुरू करने की घोषणा के बाद लोगों में खुशी है। इससे लोगों को रोजागार के अवसर मिलेंगे।
-अनूप कुमार, द्रवशाला
केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लोग भय के माहौल से उबरने लगे हैं। नई उम्मीद जगी है। अब लोग अमन के साथ जीना चाहते हैं। खुशी है कि भ्रष्टाचार कम हुआ है और विकास में तेजी आ रही है।
-रोशन गुप्ता, सरूड़
बैक टू विलेज कार्यक्रम से आम लोगों की कुछ समस्याएं हल हो रही हैं। किश्तवाड़ में टटानी-विमल नाग सड़क का निर्माण कर तारकोल बिछाई जा रही है। जिला आतंकवाद से करीब-करीब मुक्त हो गया है।
-जगदीश राज, सेलाना
आतंकियों के जुल्म का शिकार बने भभी चंद को दिख रही उम्मीद
किश्तवाड़ जिले की छात्रू तहसील के चिनगाम पंचायत के छानगाम निवासी भभी चंद आज भी आतंकी वारदात को याद कर सिहर उठते हैं। करीब 28 साल से गांव छोड़ शहर में परिवार सहित रहने को मजबूर हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब उन्हें उम्मीद की नई किरण दिखने लगी है। भभी चंद का कहना है कि 1992 में वह अपने ससुराल सिगदी गए थे, जहां आतंकियों ने उनका अपहरण कर लिया। पांच आतंकियों ने घंटों तक मारपीट की। बाद में सिगदीवासियों ने काफी जद्दोजहद कर मुक्त करवाया था। तब से वह पूरे परिवार के साथ किश्तवाड़ शहर आ गए। यहां न प्रशासन से सहायता मिली और न ही सरकार से। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब कुछ राहत महसूस हो रही है।
अभी भी परिवार जी रहा डर के साए में
आतंकी हमले में मारे गए भाजपा नेता अनिल परिहार के बेटे ने बताया कि वह अभी भी डर के साए में जी रहे हैं। हालांकि सुरक्षाबलों ने वारदात में शामिल तीनों आतंकियों को रामबन में मार गिराया था, लेकिन अभी भी उनके कई मददगार हैं। सरकार ने परिवार को पांच लाख मुआवजा और नौकरी दी है। बेशक, आतंकियों पर नकेल कसी है, लेकिन अभी भी यहां लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर पाए हैं।
एक साल में दो आतंकी ठिकाने ध्वस्त, दो आतंकी ढेर
जिले में एक साल से कोई बड़ी आतंकी वारदात नहीं हुई है। इस दौरान सुरक्षाबलों ने दो आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए वहीं, दच्छन में एसपीओ की हत्या करने वाले दो आतंकियों को तीन दिन में ढेर कर लोगों में एक विश्वास जगाया है। इसके अलावा 2018-19 में वारदातों को अंजाम देने वाले आतंकियों के मददगारों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है।
किश्तवाड़ में आतंकी घटनाओं का शिकार हुए 1600 लोग
कश्मीर के बाद सबसे अधिक आतंकी घटनाएं किश्तवाड़ में हुई हैं। जब कश्मीर में पलायन होना आरंभ हुआ उसी समय से यहां आतंकी घटनाएं होने लगीं। करीब तीन दशक में आतंकी घटनाओं में यहां करीब 1600 लोग मारे जा चुके हैं। 300 से ज्यादा आतंकी ढेर किए जा चुके हैं।