फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Now the winds of development in Kishtwar, a stronghold of terror

ग्राउंड रिपोर्टः आतंक का गढ़ रहे किश्तवाड़ में अब विकास की बयार

Sat, 31 Oct 2020 04:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजेश चंद्र, किश्तवाड़
राजेश चंद्र, किश्तवाड़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 31 Oct 2020 04:53 AM IST
विज्ञापन
Now the winds of development in Kishtwar, a stronghold of terror
demo pic... - फोटो : अमर उजाला
कश्मीर के बाद आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले की अब फिजा बदल रही है। आतंकवाद का गढ़ रहे इस जिले में अब अमन के साथ ही विकास की बयार बहने लगी है। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद किश्तवाड़ में बड़ा बदलाव दिखने लगा है। एक साल के भीतर बिजली प्रोजेक्टों समेत यहां कई विकास परियोजनाओं पर काम शुरू हुआ है। पिछले एक साल में यहां कोई बड़ी आतंकी वारदात नहीं हुई है। गोलियों-धमाकों की आवाज से कभी दहशत के साये में जीने को मजबूर लोग अब राहत महसूस कर रहे हैं। आतंकी वारदातों के चलते गांव से पलायन करने वाले लोग भी वापसी की राह देख रहे हैं।
विज्ञापन


कश्मीर के अनंतनाग, हिमाचल और लद्दाख से जुड़े किश्तवाड़ में अब वर्षों से लटकी बिजली परियोजनाएं धरातल पर उतरने लगी हैं। जिले में पक्कल डूल, क्वाड़ और कीरू प्रोजेक्टों का काम शुरू हो चुका है। निजाम बदलने के बाद चिनाब नदी पर प्रस्तावित 850 मेगावाट की रैटले पन बिजली परियोजना का रास्ता भी साफ हो गया है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधरेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। 
विज्ञापन


कोरोना महामारी के चलते बेशक विकास कार्य थम गए थे, लेकिन एक साल के दौरान किश्तवाड़ की तस्वीर बदलती दिख रही है। पाडर इलाके में मचेल मंदिर के लिए सड़क का काम जोरों से चल रहा है। बटोत-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे की हालत भी सुधर गई है। पॉलिटेक्निक कॉलेज, डिग्री कॉलेज, यूनिवर्सिटी कैंपस और अस्पताल की इमारतों का कार्य भी शुरू हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 पहले आतंकी घटनाओं से सहमे रहते थे। मगर अब ऐसा नहीं है। लोग विकास और रोजगार चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से विकास की उम्मीद जगी है। खुशी है कि रैटले पावर प्रोजेक्ट का जल्दी काम शुरू होगा। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा।
-मुदस्सर अहमद, सरूड़               

हमें शांति चाहिए। परियोजनाएं आने से रोजगार के साथ द्रवशाला में कारोबार भी बढ़ेगा। अब उस घुटन से आजादी मिली है। क्षेत्र में विकास की दरकार है। एक साल से कई प्रोजेक्टों पर काम शुरू हुआ है। लोगों को काफी उम्मीदें हैं।
-सुनील कुमार, द्रवशाला

जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से इलाके में विकास के काम आरंभ हुए हैं। दूरदराज के गांवों में पेयजल पहुंचाने के लिए जलशक्ति विभाग के काम में भी तेजी आई है। कुछ सड़कों का निर्माण शुरू हुआ है।
-मोहम्मद सलीम, सरूड़      
         
रैटले प्रोजेक्ट पर कुछ वर्ष पहले काम आरंभ हुआ था मगर राजनीतिक कारणों के बंद हो गया था। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद फिर काम शुरू करने की घोषणा के बाद लोगों में खुशी है। इससे लोगों को रोजागार के अवसर मिलेंगे।
-अनूप कुमार, द्रवशाला

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लोग भय के माहौल से उबरने लगे हैं। नई उम्मीद जगी है। अब लोग अमन के साथ जीना चाहते हैं। खुशी है कि भ्रष्टाचार कम हुआ है और विकास में तेजी आ रही है।
-रोशन गुप्ता, सरूड़           

बैक टू विलेज कार्यक्रम से आम लोगों की कुछ समस्याएं हल हो रही हैं। किश्तवाड़ में टटानी-विमल नाग सड़क का निर्माण कर तारकोल बिछाई जा रही है। जिला आतंकवाद से करीब-करीब मुक्त हो गया है।
-जगदीश राज, सेलाना

 

आतंकियों के जुल्म का शिकार बने भभी चंद को दिख रही उम्मीद

किश्तवाड़ जिले की छात्रू तहसील के चिनगाम पंचायत के छानगाम निवासी भभी चंद आज भी आतंकी वारदात को याद कर सिहर उठते हैं। करीब 28 साल से गांव छोड़ शहर में परिवार सहित रहने को मजबूर हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब उन्हें उम्मीद की नई किरण दिखने लगी है। भभी चंद का कहना है कि 1992 में वह अपने ससुराल सिगदी गए थे, जहां आतंकियों ने उनका अपहरण कर लिया। पांच आतंकियों ने घंटों तक मारपीट की। बाद में सिगदीवासियों ने काफी जद्दोजहद कर मुक्त करवाया था। तब से वह पूरे परिवार के साथ किश्तवाड़ शहर आ गए। यहां न प्रशासन से सहायता मिली और न ही सरकार से। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब कुछ राहत महसूस हो रही है।

अभी भी परिवार जी रहा डर के साए में
आतंकी हमले में मारे गए भाजपा नेता अनिल परिहार के बेटे ने बताया कि वह अभी भी डर के साए में जी रहे हैं। हालांकि सुरक्षाबलों ने वारदात में शामिल तीनों आतंकियों को रामबन में मार गिराया था, लेकिन अभी भी उनके कई मददगार हैं। सरकार ने परिवार को पांच लाख मुआवजा और नौकरी दी है। बेशक, आतंकियों पर नकेल कसी है, लेकिन अभी भी यहां लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर पाए हैं।

एक साल में दो आतंकी ठिकाने ध्वस्त, दो आतंकी ढेर
जिले में एक साल से कोई बड़ी आतंकी वारदात नहीं हुई है। इस दौरान सुरक्षाबलों ने दो आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए वहीं, दच्छन में एसपीओ की हत्या करने वाले दो आतंकियों को तीन दिन में ढेर कर लोगों में एक विश्वास जगाया है। इसके अलावा 2018-19 में वारदातों को अंजाम देने वाले आतंकियों के मददगारों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है।

किश्तवाड़ में आतंकी घटनाओं का शिकार हुए 1600 लोग
कश्मीर के बाद सबसे अधिक आतंकी घटनाएं किश्तवाड़ में हुई हैं। जब कश्मीर में पलायन होना आरंभ हुआ उसी समय से यहां आतंकी घटनाएं होने लगीं। करीब तीन दशक में आतंकी घटनाओं में यहां करीब 1600 लोग मारे जा चुके हैं। 300 से ज्यादा आतंकी ढेर किए जा चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed