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घाटी में नई चुनौती : कश्मीर में अब हाईब्रिड आतंकी, निहत्थों को निशाना बना रहा है पाकिस्तान
Mon, 05 Jul 2021 03:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 05 Jul 2021 03:55 AM IST
सार
- सुरक्षा बलों का शिकंजा कसने पर पाकिस्तान व आईएसआई ने बदली रणनीति
- हमले को अंजाम देकर सामान्य गतिविधियों में शामिल हो रहे हाईब्रिड आतंकी
- सुरक्षाबलों के लिए चुनौती, हाईब्रिड आतंकी को ट्रैक करने में आ रही दिक्कत
- कश्मीर में नेताओं और पुलिस कर्मियों की हत्या में हाईब्रिड आतंकियों का हाथ
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सांकेतिक...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कश्मीर में हाईब्रिड आतंकियों की मौजूदगी ने सुरक्षा बलों के कान खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा बलों के लिए यह नई चुनौती है। स्लीपर सेल की तरह के ये पार्टटाइम आतंकी निहत्थों को निशाना बना रहे हैं। घाटी में सुरक्षा बलों का शिकंजा कसने पर पाकिस्तान व आईएसआई ने रणनीति बदलते हुए युवाओं को हाईब्रिड आतंकी बनाना शुरू कर दिया है।
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सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि कश्मीर में हाल ही में हुईं नेताओं व पुलिसकर्मियों की हत्याओं में हाईब्रिड आतंकी शामिल थे। आईजी विजय कुमार का कहना है कि श्रीनगर में स्लीपर सेल और हाईब्रिड आतंकियों की मौजूदगी है। इन पार्टटाइम हाईब्रिड आतंकियों को ट्रैक करने में दिक्कतें आती हैं क्योंकि ये वारदात को अंजाम देने के बाद अपने सामान्य कामकाज में लग जाते हैं। लेकिन ऐसे हाईब्रिड आतंकियों पर अब पूरी निगरानी रखी जा रही है। इन्हें जल्द ही मार गिराया जाएगा।
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श्रीनगर समेत घाटी में पिछले कुछ सप्ताह में साफ्ट टारगेट को निशाना बनाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। ये घटनाएं ऐसे पिस्तौल धारी युवकों की ओर से करवाई गई है जो सुरक्षा एजेंसियों की सूची में आतंकी के रूप में नहीं हैं। ऐसे आतंकियों को खोजना मुश्किल होता है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि हाईब्रिड आतंकियों को हैंडलर्स की ओर से आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए स्टैंडबाय में रखा जाता है। वह दिए गए टास्क को पूरा करने के बाद नए टास्क का इंतजार करते हैं। इस बीच वह अपने सामान्य कामकाज को करने लगते हैं।
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निहत्थे और प्रतिरोध न करने वाले को बनाते हैं निशाना
सूत्रों ने बताया कि हताश पाकिस्तान और उसके गठजोड़ ने आतंकवाद के तरीके में बदलाव किया है। हाईब्रिड आतंकी निहत्थे और प्रतिरोध न करने वाले साफ्ट टारगेट को निशाना बनाते हैं। इनमें कारोबारी, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग, राजनीतिक पार्टियों के बिना सुरक्षा प्राप्त नेता-कार्यकर्ता और ड्यूटी पर न रहने वाले पुलिसकर्मी शामिल हैं। उद्देश्य लोगों में भय का माहौल पैदा करने के साथ ही कारोबार और सामाजिक गतिविधियों को रोकना है।
अलगाववाद के खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाना है। साथ ही हिंसा के खिलाफ रहने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस प्रकार के हमले पूरी तरह नियोजित होते हैं। किसी को निशाना बनाने से पूर्व ये आतंकी अपने टारगेट की रुटीन का पता करते हैं। कमजोर बिंदु तलाश कर टारगेट पर हमले का काम ओजीडब्ल्यू या हाईब्रिड आतंकी करते हैं। इनके लिए यह मायने नहीं रखता है कि वह किसकी हत्या कर रहे हैं।
श्रीनगर में हो चुकी कई घटनाएं
श्रीनगर पुलिस ने पिछले साल सितंबर के पहले सप्ताह में श्रीनगर को आतंकवाद मुक्त घोषित कर दिया था। इसके बाद आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों पर हमले किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह सब हमले हाईब्रिड आतंकियों ने किए। इस तरह के हमले पिछले कुछ महीने में अधिक हुए। 23 जून को हब्बाकदल इलाके में 25 वर्षीय दुकानदार उमर अहमद की दुकान के बाहर हत्या कर दी गई।
22 जून को आतंकियों ने सीआईडी इंस्पेक्टर परवेज अहमद की नौगाम में नमाज पढ़ने जाते वक्त हत्या कर दी। सीसीटीवी फुटेज से पता चला था कि दो युवकों ने पीछे से आकर पिस्टल से इंस्पेक्टर को गोली मारी थी। 17 जून को सैदापोरा इलाके में ड्यूटी पर न रहने वाले एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई थी। पुलवामा में 27 जून को आतंकियों ने एक एसपीओ, उसकी पत्नी व बेटी की हत्या कर दी थी।
कौन है हाईब्रिड आतंकी
हाईब्रिड आतंकी वे हैं जो सुरक्षाबलों की सूची में नहीं है। ये स्लीपर सेल की तरह ही इन युवाओं को पार्टटाइम आतंकी बनाया गया है। लेकिन इन्हें बरगलाकर इस तरह का कट्टरपंथी बनाया जाता है कि हैंडलर की ओर से सौंपे गए टास्क के तहत हमले कर सकते हैं। इसके बाद वे अपने सामान्य कामकाज में जुट जाते हैं। इन्हें पहचानने में दिक्कतें आती हैं।