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जमीन के रिकार्ड कंप्यूटराइज न होने पर हाईकोर्ट का नोटिस
जेएनएफ/जम्मू
Updated Fri, 06 May 2016 09:51 PM IST
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हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में जवाब पेश करने के दिए आदेश
- फोटो : Demo Pic.
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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में राज्य में जमीनों के रिकार्ड को कंप्यूटराइज करने और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के नेशनल लैंड रिकार्ड माडर्नाइजेशन प्रोग्राम योजना को अमल में लाने पर जनहित याचिका को पेश किया गया। याचिका में दावा किया इस योजना से राज्य के लोगों को काफी लाभ होगा।
एडवोकेट रफीक हुसैन खान की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश एनपाल बसंथा कुमार और न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के सचिव आयुक्त, जम्मू कश्मीर राजस्व विभाग के वित्त आयुक्त, सेटलमेंट कमिश्नर को नोटिस जारी करके तीन सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए।
सुनवाई के दौरान याची के एडवोकेट मुनीष शर्मा ने कहा पूरा विश्व नई तकनीक के युग में जा रहा है। याची ने राज्य के राजस्व विभाग और सेटलमेंट कमिश्नर को ज्ञापन भी दिया था। उसके बाद भी कोई जवाब नहीं आया। जम्मू कश्मीर राजस्व विभाग अब भी पुराने युग में है।
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नई तकनीक का उपयोग नहीं हो रहा है, जबकि केंद्र सरकार की योजना का प्रचार व प्रसार कई बार हो चुका है। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में खबर भी छपी कि राजस्व रिकार्ड के कंप्यूटराइज नहीं होने के कारण राज्य सरकार को 988.56 लाख रुपये सरेंडर करने पड़े। इस राशि को केंद्र सरकार ने जारी किया था।
राज्य सरकार की गंभीरता इसी से पता चल जाती है कि जो 200 कर्मचारी आधुनिक तकनीक के काम में जोड़े गए थे, वे कर्मचारी नए प्रशासनिक यूनिटों के कामकाज में शिफ्ट कर दिए गए।
यह भी पता चला कि इस कार्यक्रम को लांच करने के लिए क्षेत्रीय निदेशक व नोडल अधिकारियों के पद भी रिक्त पड़े हुए हैं। इसके कामकाज, रिकार्ड कंप्यूटराइज करने में देरी हो रही है और बीच में आ रही मुश्किलों को दूर करने की बजाय, उसे नजरअंदाज कर रहे हैं।
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एडवोकेट रफीक हुसैन खान की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश एनपाल बसंथा कुमार और न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के सचिव आयुक्त, जम्मू कश्मीर राजस्व विभाग के वित्त आयुक्त, सेटलमेंट कमिश्नर को नोटिस जारी करके तीन सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए।
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सुनवाई के दौरान याची के एडवोकेट मुनीष शर्मा ने कहा पूरा विश्व नई तकनीक के युग में जा रहा है। याची ने राज्य के राजस्व विभाग और सेटलमेंट कमिश्नर को ज्ञापन भी दिया था। उसके बाद भी कोई जवाब नहीं आया। जम्मू कश्मीर राजस्व विभाग अब भी पुराने युग में है।
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नई तकनीक का उपयोग नहीं हो रहा है, जबकि केंद्र सरकार की योजना का प्रचार व प्रसार कई बार हो चुका है। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में खबर भी छपी कि राजस्व रिकार्ड के कंप्यूटराइज नहीं होने के कारण राज्य सरकार को 988.56 लाख रुपये सरेंडर करने पड़े। इस राशि को केंद्र सरकार ने जारी किया था।
राज्य सरकार की गंभीरता इसी से पता चल जाती है कि जो 200 कर्मचारी आधुनिक तकनीक के काम में जोड़े गए थे, वे कर्मचारी नए प्रशासनिक यूनिटों के कामकाज में शिफ्ट कर दिए गए।
यह भी पता चला कि इस कार्यक्रम को लांच करने के लिए क्षेत्रीय निदेशक व नोडल अधिकारियों के पद भी रिक्त पड़े हुए हैं। इसके कामकाज, रिकार्ड कंप्यूटराइज करने में देरी हो रही है और बीच में आ रही मुश्किलों को दूर करने की बजाय, उसे नजरअंदाज कर रहे हैं।