मैं जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री बनने की इच्छुक नहीं हूं: महबूबा मुफ्ती
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जम्मू कश्मीर में सीएम की कुर्सी के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद के उत्तराधिकारी मानी जा रही महबूबा मुफ्ती ने इन अकटलों आज विराम लगा दिया। पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक टीवी चैनल के प्रोग्राम में आज यह साफ किया कि वह इस पद को संभालने की इच्छुक नहीं हैं।
जब महबूबा मुफ्ती से यह पूछा गया कि क्या वह आतंकवाद से प्रभावित राज्य की बागडोर संभालने वाली हैं तो महबूबा ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री बनने की उनकी कोई इच्छा नहीं है और ये बात उन्होंने अपने पिता से भी कह दी है।
महबूबा ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने की बात उनके पिता और मौजूदा मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद द्वारा शुरू की गई थी लेकिन ‘मैंने उन्हें भी ना कह दिया है।’ मैं अपने पिता की इस बात से असहमत थी।
भाजपा के साथ सरकार बनाना आसान नहीं था
जब महबूबा मुफ्ती से भाजपा के साथ गठबंधन के सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के साथ पीडीपी का अच्छा तजुर्बा था, लेकिन भाजपा के साथ सरकार बनाना आसन नहीं था।
दोनो पार्टियों को साथ आने में लगभग दो महीने लगे। जब तमाम मुद्दों पर सहमति बनाई गई तब जाकर हमने भाजपा के साथ गंठबंधन को आखिरी रुप दिया। मेरे पिता ने राज्य के लोगों और उनके विकास के लिए भाजपा के साथ गठबधन किया ना कि सत्ता के लिए।
असहिष्णुता के मुद्दे पर महबूबा ने कहा कि इस हिंदुस्तान में जितनी सहिष्णुता है, उतनी किसी भी देश में नहीं है। हिंदू धर्म और इस्लाम में सबसे अधिक समानता समानता है। यहां सफाईवाला भी शादी में साथ बैठकर खाना खाता है।
कश्मीर के लोगों ने हमेशा से युद्ध देखे हैं अगर इस समय शांति है तो इसका फायदा उठाना चाहिए। वहीं श्रीनगर में लगातार लहराए जा रहे आईएसआईएस और पाकिस्तान के झंडे पर पूछा गया कि यह कब तक फहराए जाते रहेंगे। तो उन्होनें कहा कि जब तक मीडिया इस को तूल देती रहेगी तब ये अराजक तत्व इस तरह की हरकते करते रहेगें।