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अफस्पा हटाने का उचित समय नहीं

Fri, 20 Mar 2015 09:45 PM IST
Updated Fri, 20 Mar 2015 09:45 PM IST
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not right time to remove afspa

मुफ्ती सरकार में कठुआ में थाने पर पहला फिदायीन हमला कई बातों की ओर इशारा करता है। पहला कठुआ और सांबा से अफस्पा हटाए जाने की कोशिशों के बीच हमले से स्पष्ट हो गया है कि आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) हटाने का यह उचित समय नहीं है। सीमांत इलाकों में सेना ही लाइफलाइन है।

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हमले के बाद सेना ने ही मोर्चा संभालकर आतंकियों को ढेर किया और स्थिति को काबू में किया। अब भी इस इलाके में अमन तथा शांति के लिए सेना का होना जरूरी है। सीमा पार 60 आतंकियों के घुसपैठ की तैयारी में बैठे होने की खुफिया सूचना भी इस हमले से पुष्ट होती है।
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लंबे समय से घुसपैठ में विफल रहने से बौखलाए आईएसआई तथा आतंकी संगठनों ने फिदायीन हमले की साजिश रची। तीसरा पाक डे पर 23 मार्च को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के शामिल होने से दो दिन पहले फिदायीन हमला भी बहुत कुछ इशारा करता है।
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यह हमला उस वक्त हुआ है जब आक्ट्राय पोस्ट पर दोनों देशों के बीच हुई फ्लैग मीटिंग में शांति तथा अमन बहाल रखने पर बल दिया गया।

लातार मिल रहे थे हमले के इनपुट

not right time to remove afspa

आईएसआई तथा पाक रेंजरों के सीमा पार से आतंकियों को घुसपैठ कराने की कोशिश में लगे होने की लगातार खुफिया इनपुट मिल रहे थे। खूंखार आतंकी और 26/11 का मास्टरमाइंड सलाहुद्दीन की लगातार बार्डर पर सक्रियता और आतंकियों को घुसपैठ के लिए उकसाने की भी खुफिया जानकारी मिल रही थी।

बैट हमले के भी इनपुट थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इस बाबत अलर्ट जारी किया था। तमाम बातें इस ओर इशारा कर रही है कि पाकिस्तान लगातार घुसपैठ कराने और फिदायीन हमले की साजिश कर रहा है। उधर, हुर्रियत नेता मीरवाइज ने भारत तथा पाक के बीच सचिव स्तर की वार्ता का स्वागत करते हुए कहा था कि कश्मीर के लोग इस समस्या का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं।

हुर्रियत भी इसकी पक्षधर है। उन्होंने दोनों देशों के प्रधानमंत्री से इस मसले पर सीधी बातचीत शुरू करने की अपील करते हुए था कि वे पाक डे पर इस मुद्दे को उठाएंगे। हमले का ताना बाना बुनकर हुर्रियत को भी संदेश देने की कोशिश के रूप में इस हमले को देखा जा रहा है।

सैन्य तथा पुलिस ठिकाने बन रहे टारगेट
हमले में आतंकी सैन्य तथा पुलिस ठिकानों को टारगेट बना रहे हैं। उड़ी में विधानसभा चुनाव के दौरान सैन्य ठिकाने पर हमला किया गया था। इसके पहले कठुआ में 2013 में हीरानगर थाने, 2014 में जंगलोट सैन्य शिविर तथा अब राजबाग थाने को निशाना बनाया गया है।

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