'जेएंडके से अनुच्छेद 370 हटाना जरूरी नहीं'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर हमला बोलते हुए आम आदमी पार्टी से निष्कासित योगेंद्र यादव ने कहा कि एक साल में देश में कहीं कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। न ही देश में तेजी से विकास हुआ है और न ही भ्रष्टाचार कम हुआ है। काला धन भी देश लाने के वादे अभी तक कोरे ही निकले हैं। हालांकि केजरीवाल के मुद्दे पर यादव ज्यादातर खामोश ही रहे।
यादव ने रविवार को वैकल्पिक राजनीति की दशा और दिशा विषय पर स्वराज संवाद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद जम्मू में पत्रकारों के समक्ष कुछ इस तरीके से अपनी बात रखी। यादव ने कहा कि भाजपा खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े-बड़े वादे एक साल के बाद कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
भूमि अधिग्रहण जैसे किसान विरोधी कानून बनाकर मौजूदा सरकार किसानों को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि यह देश नसीब से नहीं जन हित में नीतियां बनाने से चलेगा। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 पर पूछे गए सवाल में यादव ने कहा कि रियासत का विशेष दर्जा और अनुच्छेद 370 को बरकरार रखने की जरूरत है।
संविधान निर्माताओं ने सोच समझकर ही रियासत को विशेष दर्जा दिया हुआ है।
कश्मीरी विस्थापितों के लिए अलग टाउनशिप ठीक नहीं
कश्मीर पंडित विस्थापितों की वापसी पर उन्होंने कहा कि विस्थापितों को विश्वास में लेकर ही इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम पर योगेंद्र यादव ने कहा कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार तो होने चाहिएं, लेकिन यह किसी कानून की शक्ल में नहीं होने चाहिएं।
हालांकि केजरीवाल के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वह किसी की आलोचना में यकीन नहीं रखते। अपने संगठन वैकल्पिक राजनीति की दशा और दिशा स्वराज संवाद पर योगेंद्र यादव ने कहा कि फिलहाल उनका संगठन गैर राजनीतिक है। देश में घूमकर वह देखेंगे कि संगठन को राजनीतिक बनाना है अथवा नहीं।
इससे पूर्व में उन्होंने स्वराज संवाद के सांबा में हुए कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर आईडी खजूरिया भी मौजूद रहे। योगेंद्र यादव ने कश्मीरी विस्थापितों के अलग टाउनशिप का विरोध करते हुए कहा है कि कश्मीर में इस तरह की अलग टाउनशिप संभव भी नहीं होगी और अगर बन भी जाती है तो इसमें रहने वाले लोगों को सुरक्षा मुहैया करवाना भी संभव नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित विस्थापित परिस्थितियों से पीड़ित हैं और उन्हें विश्वास में लेकर ही कश्मीर घाटी में वापसी और पुनर्वास का काम होना चाहिए।