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खानाबदोश परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर ग्रहण

Sun, 05 Oct 2014 12:17 PM IST
Updated Sun, 05 Oct 2014 12:17 PM IST
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nomadic families's children education stranded

गुज्जर समुदाय के लिए विशेष रूप से बनाए गए मोबाइल प्राइमरी स्कूलों के अस्तित्व पर ग्रहण लगने से इस समुदाय के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है। आतंकवाद की दस्तक  के बाद जिला के 18 मोबाइल प्राइमरी स्कूलों को स्टेशनरी बना दिया गया। इन स्कूलों की मूवमेंट बंद होने से इस समुदाय के बच्चे अधिकतर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

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पिछले कुछ वर्षों में जिले के कुल 21 में से 18 स्कूलों को स्टेशनरी कर दिया गया है। हालांकि समुदाय का पेशा नहीं बदला है और उन्हें पहले की ही तरह वर्तमान में भी खानाबदोशों का जीवन व्यतीत कर साल में दो बार पहाड़ों से आने और जाने का सिलसिला जारी रखना पड़ रहा है। स्कूलों को स्टेशनरी किए जाने से इस समुदाय के बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षित नहीं हो पाएंगे।
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आतंकवाद के साए से बचाने के ल‌िए शुरु हुई थी ये मुह‌िम

nomadic families's children education stranded

जिले की कुल 11 प्रतिशत और राज्य की 25 प्रतिशत आबादी गुज्जर बक्करवाल समुदाय से संबंधित है। ऐसे में शिक्षा को लेकर इस तरह से लापरवाही आने वाले दिनों में और भी मंहगी पड़ सकती है। इस बारे में गुज्जर बकरवाल स्टेट एडवाइजरी बोर्ड के उपाध्यक्ष बशीर नाज ने बताया कि आतंकवाद के चरम पर होने के दौरान समुदाय की असुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन राज्यपाल द्वारा एक बैठक में इन स्कूलों को स्टेशनरी करने के निर्देश जारी किए गए थे।

इस बार समुदाय ने एक बार फिर मौसम के अनुरूप पलायन शुरू कर दिया है। गुज्जर बक्करवाल साल के दस महीनों तक अपने मवेशियों के साथ खानाबदोश का जीवन ही व्यतीत करते हैं। 19 सितंबर 2011 को स्टेट एडवाइजरी बोर्ड की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी समुदाय की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए 100 मोबाइल स्कूल देने और कई स्टेशनरी हो चुके स्कूलों को एक बार फिर शुरू करने के लिए आश्वस्त किया था। जल्द ही इस तरह के कदम उठाए जाने से समाज को एक नई दिशा की ओर अग्रसर किया जा सकता है।

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