J&K: निर्मल ने संभाली स्पीकर की कुर्सी, विपक्ष ने लगाया नियमों की अनदेखी का आरोप
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भाजपा विधायक तथा पूर्व उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह वीरवार को विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार और बांदीपोरा के कांग्रेस विधायक उस्मान मजीद को हराया। इससे पहले विपक्ष ने नियमों की अनदेखी करते हुए चुनाव कराने का आरोप लगाया और विधानसभा में हंगामा किया।
इसको देखते हुए आधे घंटे तक सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव का प्रस्ताव कानून मंत्री बशारत बुखारी की ओर से पेश किया गया। उप मुख्यमंत्री कवींद्र गुप्ता ने इसका अनुमोदन किया। पीठासीन अध्यक्ष नजीर अहमद गुरेजी ने वोटिंग कराई जिसमें डा. निर्मल सिंह अध्यक्ष चुने गए।
चुनाव प्रक्रिया का विरोध करते हुए विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया। इससे पहले दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और हंगामा किया। उनका कहना था कि सरकार ने जल्दबाजी में चुनाव की अधिसूचना जारी की है और यह प्रक्रिया असंवैधानिक है।
उनका कहना था कि करीब 18 सदस्य मौजूद नहीं है। संविधान के तहत अधिसूचना के बाद करीब 12 घंटे का समय दिया जाना चाहिए। विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य मोहम्मद शफी उड़ी ने विधानसभा की रूल बुक में दिए गए नियमों का हवाला देते देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए एक निर्धारित समय सीमा का पालन करना होता है लेकिन सरकार की ओर से नौ मई को अधिसूचना जारी की गई और उसी दिन नामांकन के लिए फार्म जारी कर दिए गए।
क्या सभी सदस्यों को इसकी जानकारी दी गई ? विधानसभा सेक्रेटरी को हर सदस्य को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी चाहे वह टेलीग्राम के जरिये या फिर टेलीफोन के जरिये। इस समय विपक्ष के नेता और कई सदस्य मौजूद नहीं हैं।
सत्ताधारी पार्टी की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन्होंने अपने सभी नेताओं को इसलिए बुलाया क्योंकि इन्हें राज्यपाल के अधिसूचना की पहले से जानकारी थी। उन्होंने चुनाव टालने की गुजारिश करते हुए कहा कि आपके पास आंकड़ा है।
सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई तो विपक्ष ने हंगामा करने की कोशिश की, लेकिन डिप्टी स्पीकर ने उन्हें बोलने नहीं दिया। कहा कि उन्होंने मतभेद दूर करने की कोशिश की थी लेकिन विपक्ष अपने फैसले पर अटल है। अब सदन का वक्त जाया नहीं होने दिया जाएगा और चुनाव होगा।
इस पर विपक्ष के नेता शफी उड़ी ने फिर खड़े होकर 10 मार्च 1952 के साथ कुछ अन्य घटनाओं का हवाला देते हुए बताने की कोशिश की कि ऐसा भी हुआ था, लेकिन गुरेजी ने यह एक प्रक्रिया है ना कि नियम। इस बीच डिप्टी स्पीकर ने कानून मंत्री सैयद बशारत बुखारी से प्रस्ताव रखने को कहा।
उन्होंने डा. निर्मल सिंह का स्पीकर पद के लिए नाम प्रस्तावित किया। इस बीच नेकां के अब्दुल मजीद लारमी ने विपक्षी दलों की ओर से कांग्रेस के उस्मान मजीद को उम्मीदवार घोषित किया। नेकां के अली मोहम्मद सागर ने कहा कि हम अटल नहीं है लेकिन हम कानून के तहत स्पीकर का चयन करना चाहते हैं।
सरकार अटल है और संविधान की खिलाफत करने पर तुली हुई है। डिप्टी स्पीकर ने सदन में मौजूद सदस्यों से अपनी राय पेश करने को कहा जिन्होंने बहुमत से डॉ निर्मल सिंह को स्पीकर पद के लिए चुना। इस पर नाराज होकर विपक्षी दल के सदस्य सदन से वॉक आउट कर बैठे।
डॉ निर्मल सिंह के विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सत शर्मा, बशारत बुखारी, इंजीनियर रशीद, मियां अल्ताफ, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी की मौजूदगी में पद ग्रहण करवाया और उन्हें मुबारकबाद पेश की।