निर्जला एकादशी: 21 जून को करें भगवान विष्णु की पूजा, पढ़ें पूजन विधि और व्रत से जुड़ी जानकारी
इस दिन शाम 05:33 बजे तक शिव योग रहेगा। उसके बाद सिद्धि योग शुरू होगा। यह योग सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला माना जाता है। इसमें शुभ कार्यों में सफलता मिलती है।
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निर्जला एकादशी का व्रत सोमवार 21 जून को है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। इसे भीम एकादशी भी कहते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार जो भक्त सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक बिना खाए, जल ग्रहण किए निर्जल रहकर व्रत करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और यश, वैभव, सुख की प्राप्ति होती है। दान-पुण्य से पापों से मुक्ति मिलती है। महंत रोहित शास्त्री के अनुसार वर्ष में 24 एकादशी होती हैं, लेकिन जब अधिकमास ‘मलमास’ आता है तब इनकी संख्या 26 हो जाती है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है।
ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि रविवार 20 जून शाम 04:22 बजे शुरू होगी और सोमवार 21 जून दोपहर 01:32 बजे समाप्त होगी। सूर्योदय व्यापनी एकादशी तिथि 21 जून सोमवार को होगी, इसलिए निर्जला एकादशी व्रत सोमवार को होगा।
ठंडे-मीठे जल की छबीलें लगाने का विशेष महत्व
इस दिन ब्राह्मणों व जरूरतमंद लोगों को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। लोग पितरों की आत्मिक शांति के लिए ठंडे-मीठे जल की छबीलें लगाते हैं। निर्जला एकादशी पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण घर में ही पानी में गंगाजल डाल स्नान कर व्रत रखें और भगवान विष्णु की आराधना करें। तामसिक वस्तुओं (शराब, मांस आदि) का सेवन करने से बचें।