नवेद बोला, 'जो कुछ था बता दिया, मुझे तंग मत करो'
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एनआईए द्वारा लगातार तीन दिन तक कश्मीर के तमाम ठिकानों को खंगालने के बाद पाकिस्तानी आतंकी नावेद उर्फ उस्मान को सोमवार को कड़ी सुरक्षा में हवाई जहाज द्वारा श्रीनगर से जम्मू लाया गया। एजेंसी के मुताबिक उसे एनआईए की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। हालांकि आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
एजेंसी के मुताबिक दोपहर बाद उसे पुलिस और एनआईए की टीम द्वारा विमान से जम्मू लाया गया और स्पेशल एनआईए कोर्ट में रिमांड के लिए पेश किया गया। बाद में नावेद को मीरां साहिब स्थित ज्वाइंट इंटेरोगेशन सेंटर (जेआईसी)े ले जाया गया।
बताया जाता है कि वहां जेएंडके पुलिस के उच्च अफसरों की टीम ने भी उससे पूछताछ की है। एनआईए टीम जांच में कुछ स्थानीय पुलिस अफसरों की मदद भी ले रही है।
एनआईए की एक अन्य टीम सोमवार को चिनैनी थाने पहुंची और पुलिस से हमले के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं। इससे पहले नारसू का दौरा कर कुछ स्थानीय लोगों से पूछताछ की।
आतंकियों को पांच लाख रुपये मुहैया करवाए थे
एनआईए टीम ने उस व्यापारी को पकड़ने के लिए भी व्यापक अभियान छेड़ा, जिसने आतंकियों को पांच लाख रुपये मुहैया करवाए थे। उक्त व्यापारी की श्रीनगर में दुकान है। बताया जाता है कि श्रीनगर स्थित स्पेशल आपरेशन ग्रुप में पूछताछ के दौरान नावेद कई बार झल्ला गया।
जब उससे रूट के बारे पूछा तो नावेद ने पंजाबी भाषा में कहा, ‘मेरे कोल जिना वी सी, मैं दस दिता। होर मेरे कोल कुछ नहीं है। मैंनू तंग न करो।’ (मेरे पास जो कुछ भी था, मैंने बता दिया। अब मेरे पास कुछ नहीं है। मुझे तंग न करें।) बताया जाता है कि जिस भाषा में नावेद बात कर रहा है, वह फैसलाबाद और सियालकोट में बोली जाती है।
सोमवार को भी एनआईए टीम ने कुलगाम, पुलवामा और अनंतनाग जिले के कई स्थानों पर छापामारी की। संभावना है कि कुछ और लोग एनआईए के घेरे में आएंगे। नावेद से मिली जानकारी के आधार पर अब तक एनआईए एक दर्जन लोगों को हिरासत में ले चुकी है।
किशोर उम्र में ही आतंकी संगठन से जुड़ा था नावेद
नावेद किशोर उम्र में ही आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ गया था। वर्ष 2011 में ही उसे बशीर नामक व्यक्ति ने लश्कर से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया था और उसे फैसलाबाद स्थित लश्कर कार्यालय में लेकर गया था।
उस समय उसने 21 दिनों का आरंभिक प्रशिक्षण प्राप्त किया था और घर लौट गया था। इसकी जानकारी उसने अपने पिता मोहम्मद याकूब को भी दी थी। उसके बाद उसने मुजफ्फराबाद में तीन माह तक हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया।
वर्ष 2014 में उसे फिर शावाई नाला स्थित लश्कर के प्रशिक्षण शिविर में तीन माह की ट्रेनिंग दी गई। उसे एके-47, पिस्टल चलाने के अलावा ग्रेनेड फेंकने का भी प्रशिक्षण दिया गया। मार्च 2015 में उसे आपरेशन के लिए सम्मन किया गया था।