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आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए नए तेवर में आएगी एनआईए जम्मू ब्रांच
Thu, 28 Nov 2019 01:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 28 Nov 2019 01:33 AM IST
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NIA (सांकेतिक तस्वीर)
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जल्द ही नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की जम्मू ब्रांच नए रंग रूप में होगी। एजेंसी ने अपना दायरा बढ़ाते हुए जम्मू में नया कार्यालय बनाने का काम शुरू कर दिया है। अभी जम्मू ब्रांच किराए की इमारत में चल रही है।
अब एनआईए की अपनी इमारत होगी। यही नहीं, अब यह इकाई विशेष रूप से जम्मू कश्मीर के मामलों की जांच करेगी। अब तक जम्मू ब्रांच को पड़ोसी राज्य पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल और हरियाणा का काम भी देखना पड़ता था।
जम्मू कश्मीर में आतंकी वारदातों और इनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पड़ोसी राज्यों का भार जम्मू ब्रांच से कम कर दिया गया है। जम्मू के सिद्धड़ा में 20 कनाल जमीन पर एनआईए का कार्यालय बन रहा है।
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इसमें कई तरह की सुविधाएं होंगी। यहां एनआईए आतंकी वारदातों, हवाला रैकेट और टेरर फंडिंग के मामलों की जांच कर सकेगी। अकेले जम्मू कश्मीर के लिए ब्रांच होने से अब मामलों की जांच में तेजी आएगी। पूछताछ में कुछ अहम टेस्ट भी होते हैं, जिनको जम्मू में उपलब्ध कराया जाएगा। पूछताछ के लिए अलग-अलग केबिन होंगे।
हर तरह की पूछताछ के बंदोबस्त किए जाएंगे। इस समय एनआईए के पास जम्मू कश्मीर के 25 से अधिक केस रजिस्टर हैं। इनमें से अधिकतर की जांच के बाद चार्जशीट पेश की जा चुकी है। कुछ चार्जशीट तैयार हैं। 20 नए लोगों को एनआईए ने अपने रडार पर रखा हुआ है। एक उप ब्रांच श्रीनगर में भी खोली गई है। यहां पर डीएसपी स्तर के अधिकारी हैं।
अहम हुई एनआईए की भूमिका
यासीन मलिक, शब्बीर शाह, इंजीनियर रशीद, आसिया अंद्राबी जैसे दिग्गज अलगाववादी नेताओं को सलाखों के पीछे भेजने में एनआईए की अहम भूमिका है। जम्मू कश्मीर सहित अन्य हिस्सों में पल रहे आतंकवाद को पाकिस्तान की मदद का खुलासा भी एनआईए ने ही किया है। आतंकियों के टेरर कनेक्शन, इनके लिए फंड जुटाने वाले मददगारों, क्रॉस एलओसी ट्रेड से आतंकियों को मदद, जम्मू कश्मीर बैंक में बड़े स्तर पर फंड का घोटाला जैसे मामलों की जांच एनआईए ने की है।
100 से अधिक अफसरों, कर्मियों का कुनबा
मौजूदा समय में एनआईए ने जम्मू में अपना कुनबा भी मजबूत कर लिया है। तीन दर्जन के आसपास अधिकारियों और इनकी कमान संभालने केलिए एक एसएसपी स्तर के आईपीएस अफसर को एनआईए जम्मू ब्रांच की कमान दी गई है।
अब एनआईए की अपनी इमारत होगी। यही नहीं, अब यह इकाई विशेष रूप से जम्मू कश्मीर के मामलों की जांच करेगी। अब तक जम्मू ब्रांच को पड़ोसी राज्य पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल और हरियाणा का काम भी देखना पड़ता था।
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जम्मू कश्मीर में आतंकी वारदातों और इनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पड़ोसी राज्यों का भार जम्मू ब्रांच से कम कर दिया गया है। जम्मू के सिद्धड़ा में 20 कनाल जमीन पर एनआईए का कार्यालय बन रहा है।
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इसमें कई तरह की सुविधाएं होंगी। यहां एनआईए आतंकी वारदातों, हवाला रैकेट और टेरर फंडिंग के मामलों की जांच कर सकेगी। अकेले जम्मू कश्मीर के लिए ब्रांच होने से अब मामलों की जांच में तेजी आएगी। पूछताछ में कुछ अहम टेस्ट भी होते हैं, जिनको जम्मू में उपलब्ध कराया जाएगा। पूछताछ के लिए अलग-अलग केबिन होंगे।
हर तरह की पूछताछ के बंदोबस्त किए जाएंगे। इस समय एनआईए के पास जम्मू कश्मीर के 25 से अधिक केस रजिस्टर हैं। इनमें से अधिकतर की जांच के बाद चार्जशीट पेश की जा चुकी है। कुछ चार्जशीट तैयार हैं। 20 नए लोगों को एनआईए ने अपने रडार पर रखा हुआ है। एक उप ब्रांच श्रीनगर में भी खोली गई है। यहां पर डीएसपी स्तर के अधिकारी हैं।
अहम हुई एनआईए की भूमिका
यासीन मलिक, शब्बीर शाह, इंजीनियर रशीद, आसिया अंद्राबी जैसे दिग्गज अलगाववादी नेताओं को सलाखों के पीछे भेजने में एनआईए की अहम भूमिका है। जम्मू कश्मीर सहित अन्य हिस्सों में पल रहे आतंकवाद को पाकिस्तान की मदद का खुलासा भी एनआईए ने ही किया है। आतंकियों के टेरर कनेक्शन, इनके लिए फंड जुटाने वाले मददगारों, क्रॉस एलओसी ट्रेड से आतंकियों को मदद, जम्मू कश्मीर बैंक में बड़े स्तर पर फंड का घोटाला जैसे मामलों की जांच एनआईए ने की है।
100 से अधिक अफसरों, कर्मियों का कुनबा
मौजूदा समय में एनआईए ने जम्मू में अपना कुनबा भी मजबूत कर लिया है। तीन दर्जन के आसपास अधिकारियों और इनकी कमान संभालने केलिए एक एसएसपी स्तर के आईपीएस अफसर को एनआईए जम्मू ब्रांच की कमान दी गई है।