लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला, श्रीनगर में प्रेस पर लगाई गई पाबंदियां
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कश्मीर में मोबाइल फोन और इंटरनेट के बाद प्रेस की आजादी पर हमला किया गया। श्रीनगर में लोकल केबल और अखबारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बीती रात श्रीनगर में प्रशासन ने लोकल अखबारों के दफ्तरों पर छापेमारी कर अखबारों को छपने से रोक दिया।
छपे अखबारों को जब्त कर दफ्तरों से कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया। राइजिंग कश्मीर के एडिटर इन चीफ शुजात बुखारी के अनुसार यह प्रेस की आजादी पर बड़ा हमला है। ऐसी चीजों से कोई समाधान नहीं निकल पाएगा। उन्होंने कहा कि सुबह सवेरे हमारी गाडि़यां जब्त की गईं। अगर हमें पहले ही बता दिया गया होता तो हम अखबार भेजते ही नहीं।
प्रतिबंध के खिलाफ पत्रकारों ने प्रेस कालोनी के बाहर धरना देकर प्रेस की आजादी की आवाज बुलंद की। उनके हाथों में नारे लिखी तख्तियां भी थीं। धरना देने वालों में सुजात के साथ ही बशीर मंजर, मसूद हुसैन शामिल थे। यही हाल श्रीनगर में चल रहे केबल ऑपरेटरों का भी है।
इंटरनेट और मोबाइल सेवा पहले ही बंद
बीती रात पुलिस ने केबल ऑपरेटरों को आदेश दिया कि वह अपने ट्रांसमीटर डाउन कर दें और किसी भी चैनल को प्रसारित न करे। केबल ऑपरेटर रोमेल शफी के अनुसार रात में ही पुलिस वालों ने उनके दफ्तर में आकर सिग्नल डाउन करा दिया।
श्रीनगर में आठ दिनों से चल रहे कर्फ्यू से जिंदगियां बेहाल हो चुकी हैं। इंटरनेट और मोबाइल सेवा पहले ही बंद थे। अब दुनिया से जुड़े रहने का इकलौता साधन केबल और अखबार भी छीन लिया गया। कश्मीर में प्रतिदिन 200 से ज्यादा अखबार छपते हैं और 50 प्रतिशत की आबादी लोकल केबल नेटवर्क पर आश्रित है।