बदले-बदले नजर आए मोदी, कश्मीरी तेवर गायब
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बदले-बदले अंदाज में नजर आए। लिबास तो बदला ही मुद्दे भी बदल गए। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के क्रम में 9 रैलियों को संबोधित करने वाले मोदी ने छह रैलियों में कुर्ता, पजामा और हाफ जैकेट धारण कर रखा था।
श्रीनगर रैली में वे फिरन में नजर आए, लेकिन, अंतिम दो रैलियों में जन सैलाब को मोदी सूूटबूट में दिखे। मोदी आम तौर पर विदेश यात्रा में ऐसे पहनावे का इस्तेमाल करते दिखे हैं। यह महज लिबास का बदलाव नहीं था। जम्मू और बिलावर की रैली में मोदी के मुद्दे भी बदल गए। वह जम्मू के साथ भेदभाव पर खुलकर बोले और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को करारा जवाब भी दिया। वैसे अनुच्छेद 370 पर चुप्पी बरकरार रखी।
एक दिन पहले ही उमर ने कहा था कि घाटी में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिलेगी। अब बारी मोदी की थी। आक्रामक अंदाज में उन्होंने मतदाताओं से कहा कि ऐसी भाषा का उसी भाषा में उत्तर दिया जाना चाहिए।
अब वक्त आ गया है कि जम्मू भी उनको (उमर को) यह कह दे कि जम्मू की 20 सीटों में से उन्हें भी एक भी सीट नहीं मिलेगी। मोदी ने उमर की ओर संकेत करते हुए कहा कि लद्दाख, घाटी और जम्मू में वह (उमर) सूक्ष्म दर्शी यंत्र से भी नजर नहीं आएंगे। जनता ने उन्हें विदाई देकर भविष्य पर भी ताला लगा दिया है।
सीटों के गणित ने मोदी को एजेंडा बदला
दरअसल, सीटों के गणित ने मोदी को एजेंडा बदलने को मजबूर किया। अंतिम चरण में 20 सीटों पर चुनाव होना है और सभी सीटें जम्मू संभाग की ही हैं। इनमें से अधिकांश पर हिंदू वोट बैंक का प्रभाव है। कश्मीर और मुस्लिम प्रभाव क्षेत्र वाली सीटों के लिए प्रचार में आए मोदी जब क्षेत्रीय भेदभाव की बात करते थे तब घाटी में भी भेदभाव की चर्चा करते थे।
तब मोदी का स्टैंड था कि भेदभाव सिर्फ जम्मू के साथ ही नहीं कश्मीर में भी क्षेत्रों के हिसाब से होता रहा है। नेकां और पीडीपी दूसरे के प्रभाव क्षेत्र वाले इलाके से भेदभाव करती रही हैं। लेकिन, जम्मू रैली में मोदी का यह स्टैंड बदल गया। उन्होंने सिर्फ जम्मू के साथ भेदभाव की बात की। उन्होंने साफ कहा कि वे जम्मू के स्वाभिमान को चुनौती देने आए हैं। जज्बे को ललकारने आए हैं।