कश्मीर का ये गांव 1892 से लड़ रहा बिजली के लिए
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आज के इस आधुनिक युग में भले ही यह बात सुनकर हैरानगी होती हो, मगर यह बात सच है कि इक्कीसवीं सदी में भी त्राल का एक गांव नौदल ऐसा है, जो बिजली सुविधा से अभी तक महरूम है।
दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल इलाके के नौदल गांव में करीब 1200 चूल्हे दर्ज हैं और इसकी औसतन आबादी 5000 के करीब है लेकिन यहां के स्थानीय लोग आज भी बिजली को तरस रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दशकों से वह बिजली की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई। स्थानीय निवासी इरफान अहमद का कहना है कि उन्होंने अपने बुजुर्गों से सुना है कि वर्ष 1892 से यहां के लोग गांव में बिजली लाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन अभी भी उनके हाथ निराशा ही लगी है।
इरफान के अनुसार गांव की कई पीढि़यां खत्म हुई मगर मांग पूरी नहीं हुई। कभी इस गांव के लोगों को दूसरे गांवों से बिजली फरहाम की जाती, लेकिन फिर कुछ समय बाद काट दी जाती।
बिजली के लिए विधायक से भी की गई अपील
एक ओर स्थानीय निवासी शाहिद भट के अनुसार दस वर्ष पूर्व साथ के गांव से उन्हें बिजली मुहैया करवाई गई थी लेकिन फिर बाद में गांव वालों ने बिजली देना बंध कर दिया। तब से वह बिजली की मांग को लेकर नेता से लेकर हर अधिकारी का दरवाजा खटखटाया मगर हासिल कुछ नहीं हुआ।
भट के अनुसार जिला बिजली विभाग ने इस गांव को बिजली देने के कार्य में लगने वाली लागत केवल 7 लाख बताई है। मगर केवल 4 लाख वह दे रहे हैं। जबकि बाकी की रकम के लिए इलाके के लोगों ने विधायक से मदद की मांग की लेकिन वहां से भी निराशा हाथ लगी।
ऐस बर्ताव को देख लोग अब आक्रोशित हैं। उन्हें रोष है कि वोट मांगने के वक्त सब उनसे बड़े -बड़े वादे करते हैं लेकिन जब मदद की मांग की जाती है तो कोई साथ नहीं देता।
लोग मजबूरन अब धरना प्रदर्शन पर उतर आए हैं और उनका कहना है कि यह सब ऐसे ही जारी रहेगा, जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती। वहीं, विभाग के चीफ इंजीनियर से जब संपर्क साधने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं साधा जा सका।