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जंगल की आग से इंसानों और जानवरों में टकराव
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 11 May 2015 04:51 PM IST
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जंगलों में लगने वाली आग सिर्फ वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी परेशानी बनेगी। लगातार पारा चढ़ रहा है और आने वाले दिनों में जंगल सुलगेंगे।
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ऐसे में आग लगने से वन्यजीव वहां से भाग कर रिहायशी इलाकों में आ जाते हैं और लोगों पर हमला बोल देते हैं। इसमें कई लोगों की जान चली जाती है और कई जानवरों को भी मार गिरा दिया जाता है। जो वन्यजीव विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
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जंगल की घटनाओं को छोड़ भी दिया जाए तो भी लोगों और जानवरों में होने वाली घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में इंसान और जानवर की लड़ाई में 37 लोगों की जान चली गई।
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20 वन्यजीवों (9 भालुओं, 8 तेंदुओं और 3 लोमड़ियों) की भी मौत हुई। इसी तरह पिछले वर्ष 14 लोगों की जान चली गई और इस तरह के 211 मामले सामने आए। इन बढ़ते मामलों ने विभाग के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
पिछले दो साल की इन घटनाओं पर नजर डाली जाए तो इनमें अधिकतर मामले राजोरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, रियासी और कश्मीर संभाग के पहाड़ी इलाकों के हैं। यहां इंसानों का वन्यजीवों के क्षेत्र में दखल देना घातक साबित हो रहा है। रही बची कसर गर्मियों में जंगलों में लगने वाली आग पूरी कर देती है।