फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   news about Kashmiri Pandits return in J&K

कश्मीर: घर वापसी के समय क्यों तन जाती हैं बंदूकें?

Fri, 10 Apr 2015 01:34 PM IST
Updated Fri, 10 Apr 2015 01:34 PM IST
विज्ञापन
news about Kashmiri Pandits return in J&K

आतंकवाद के दौर में घाटी से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी की बात अलगाववादी और मुख्य धारा के सभी दल करते हैं लेकिन जब-जब वापसी के आसार पैदा होते हैं तो बंदूकें तन जाती हैं।

विज्ञापन


नब्बे के दशक में आतंकवाद ने जब कश्मीर की साझा संस्कृति का ताना बाना छिन्न-भिन्न कर दिया तो बेबस पंडितों ने अपने पुरखों का घर छोड़ा।

हालात में सुधार के सरकारी दावे उमर अब्दुल्ला के शासनकाल में होते रहे और अब मुफ्ती मोहम्मद भी वही राग अलाप रहे हैं। लेकिन सच यह है कि घाटी के गांवों में हालात वैसे नहीं हैं जिसमें वापसी के बाद पंडितों की सुरक्षा की गारंटी हो।
विज्ञापन


लिहाजा, केंद्र सरकार ने अलग टाउनशिप पर काम करना शुरू किया तो आतंकवादी गुटों और अलगाववादियों को यह रास नहीं आ रहा।

अलगाववादियों के साथ पीडीपी-नेकां

news about Kashmiri Pandits return in J&K

इस मुद्दे पर घाटी में मुख्य धारा के अहम दल पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस का रुख भी अलगाववादियों के करीब ही है। ऐसे पंडितों की वापसी का अहम मसला फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिए जाने के आसार बढ़ गए हैं।

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने इसके संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर कोई जल्दी नहीं है। केंद्र सरकार ने 2008 में पंडितों के वापसी के लिए पैकेज की घोषणा की।

केंद्र प्रायोजित 1618 करोड़ के इस पैकेज के तहत अब तक सिर्फ एक पंडित परिवार की घर वापसी हुई। इस पैकेज के तहत पंडितों को घर बनाने के लिए राशि देने का प्रावधान है।

एक कश्मीरी पंडित परिवार को इस मद में साढ़े सात लाख मिले। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि 1446 पंडित युवकों को रोजगार दिया गया और घाटी में 469 ट्रांजिट आवास बनाए गए।

जम्मू में रह रहे 62 हजार परिवार

news about Kashmiri Pandits return in J&K

प्रधानमंत्री पुनर्वास कार्यक्रम के तहत 2004 में जम्मू में 5242 दो कमरे वाले सेट बने जो कश्मीरी विस्थापितों का आवंटित किए गए हैं। घाटी के शेखपोरा और बडगाम में 200 फ्लैट बने जिन्हें वैसे पंडितों को दिया गया है जिन्होंने जम्मू कश्मीर सरकार में नौकरी हासिल की।

इनमें से 31 फ्लैट स्थानीय पंडितों को दिए गए जिन्हें धमकियों के बाद अपना गांव छोड़ना पड़ा था। कश्मीर में अलग टाउनशिप के चौतरफा विरोध के बाद पंडित समाज दुविधा में है। पंडितों के 62 हजार परिवार जम्मू, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में रह रहे हैं।

कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू कहते हैं कि घाटी में रह रहे पंडितों की एक सेलेक्ट कमेटी बनाकर तय समय सीमा के भीतर पुनर्वास नीति बनानी चाहिए।

उधर आतंकी संगठन यूनाइटेड जेहाद काउंसिल ने भी चेतवानी दी है कि अलग टाउनशिप बनने नहीं दी जाएगी। जाहिर पंडितों की वापसी की राह अब भी आसन नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed