दस तक खुश्क रहेगा रियासत का मौसम
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रियासत में खुश्क मौसम और शीतलहर का प्रकोप बना रहेगा। दस जनवरी तक मौसम में खास परिवर्तन की संभावना नहीं है। कुपवाड़ा में मंगलवार को हलकी बारिश हुई। कारगिल, लेह और श्रीनगर में तापमान लगातार माइनस में चल रहा है। श्रीनगर का अधिकतम तापमान 12.3 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम तापमान माइनस 1.4 डिग्री सेल्सियस रहा।
जम्मू का अधिकतम तापमान 19 डिग्री और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री रहा। कारगिल का अधिकतम तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान माइनस 13.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। लेह का अधिकतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम माइनस 7.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
जम्मू संभाग के भद्रवाह, कठुआ, पत्नीटाप, राजोरी आदि क्षेत्रों में हलकी धूप रही, लेकिन शीत लहर का जबरदस्त प्रकोप रहा। पत्नीटाप में बर्फबारी के अभाव में पर्यटकों को मायूसी हाथ लग रही है।
जम्मू संभाग के किसानों को बारिश न होने से निराशा हो रही है। मौसम विभाग श्रीनगर के मुताबिक दस जनवरी तक राज्य के मौसम में कोई खास तब्दीली नहीं आएगी। कोहरे का असर रहेगा तथा कश्मीर संभाग में सर्दी बढ़ेगी।
बारिश नहीं होने से किसानों में निराशा
कश्मीर में कई महीनों से चल रहे सूखे मौसम से किसानों में निराशा है। उनके अनुसार, अगर बारिश या बर्फबारी नहीं होती है तो आने वाले समय में काफी परेशानी हो सकती है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। घाटी में सितंबर में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही यहां का मौसम करीब-करीब सूखा ही देखने को मिला।
अब जब बर्फबारी का समय आया है तब भी घाटी में मौसम सूखा ही है। जिसके चलते कश्मीर के किसान काफी परेशान दिख रहे हैं। उनका कहना है कि पहले बारिश नहीं हुई और अब बर्फबारी नहीं हो रही। मेवा उत्पादक मुश्ताक अहमद के अनुसार, मौसम सूखा चल रहा है जो आने वाले भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।
उनका यह भी कहना है कि अगर पर्याप्त मात्रा में उनके पेड़ों को पानी नहीं मिला तो उनकी फसल को नुकसान भी हो सकता है। मुश्ताक के अनुसार, कश्मीर में चल रहे सर्दियों के यह 40 दिन (चिल-ए-कलां) काफी महत्वपूर्ण होते हैं। अगर दिसंबर 21 से जनवरी 31 के बीच बर्फबारी होती है तो वो कहीं गर्मियों में जाकर पिघलना शुरू होती है।
यही बर्फ उस समय पानी का मुख स्रोत साबित होती है। अगर इस चिल-ए-कलां के दौरान मौसम सूखा रहे तो गर्मियों के दिन काफी दुश्वारियों भरे होंगे। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी फसल के लिए पानी काफी महत्वपूर्ण है। सही मात्रा में अगर पानी न मिले तो फसल के अलावा पेड़ों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
मेवा उत्पादकों की मानें तो भले ही यह मौसम मेवे के पेड़ों के लिए अच्छा है, लेकिन आने वाले समय में उन्हें पानी की आवश्यकता होगी, जो इस समय होने वाली बर्फबारी से प्राप्त होता है। अगर बर्फबारी नहीं होगी तो पानी कहां से मिलेगा। मौसम विभाग ने भी अगले एक हफ्ते तक मौसम के ऐसा ही रहने की भविष्यवाणी की है, जिससे किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
गौरतलब है कि कश्मीर की 65 प्रतिशत आबादी कृषि और मेवा उत्पादन पर निर्भर करती है। इस क्षेत्र से सालाना करीब तीन हजार करोड़ का मुनाफा कमाया जाता है।
श्रीनगर में बिजली कटौती पर प्रदर्शन
कश्मीर में भीषण सर्दी के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ सर्दी और साथ ही बिजली में भारी कटौती ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बिजली की भारी कटौती से खफा होकर नागरिकों ने मंगलवार को श्रीनगर के कई इलाकों में बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।
श्रीनगर के लाल चौक से सटे गौकदल इलाके में महिलाओं ने सड़कों पर उतर कर बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रही महिला सकीना के अनुसार, सर्दी ने तो जीना मुश्किल किया ही है, अब बिजली कटौती ने और मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
उनके अनुसार आजकल अधिकतर कार्य बिजली पर ही निर्भर हैं। अगर बिजली नहीं हो तो सब कार्य वैसे ही धरे रह जाते हैं। उन्होंने विभाग से मांग की कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में बिजली दी जाए। इसके अलावा पातशाही बाघ, मेहजूर नगर, बटमालू आदि इलाकों से भी बिजली कटौती पर प्रदर्शन हुआ।
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि विभाग पर्याप्त बिजली दे ताकि आम जनता को मुश्किलों का सामना न करना पड़े। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली कटौती से उनके बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उनका यह भी आरोप है कि सरकार का दरबार सर्दियों में जम्मू चले जाने के बाद से ही घाटी के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।