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न आतंकियों का खौफ, न पत्थरबाजों का डर, कश्मीरी बैट की फैक्ट्री पर ताला नहीं
Thu, 05 Sep 2019 02:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा
बृजेश कुमार सिंह, संगम (अनंतनाग)
बृजेश कुमार सिंह, संगम (अनंतनाग)
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 05 Sep 2019 02:12 AM IST
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कश्मीरी बैट
- फोटो : अमर उजाला
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आतंकवाद का गढ़ रहे दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के संगम इलाके में कश्मीरी क्रिकेट बैट का व्यापक पैमाने पर उत्पादन होता है। यहां बैट बनाने की 100 से अधिक फैक्ट्रियां हैं।
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राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद भी यहां की फैक्ट्रियों पर न तो ताला है और न ही उत्पादन ठप हुआ है। इन्हें न तो आतंकियों का खौफ है और न पत्थरबाजों का डर। फर्क सिर्फ इतना है कि खुलेआम बैट बनाने का काम न कर उत्पादक मुख्य गेट को बंद कर अंदर अपना काम आराम से कर रहे हैं।
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संगम इलाके के हालमुला और बिजबिहाड़ा तथा आस-पास के इलाकों में छोटे-बड़े पैमाने पर बैट बनाने का काम किया जाता है। बैट बनाने वाले मजदूर बाहरी राज्यों के नहीं हैं, बल्कि कश्मीरी ही हैं। राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद लगभग एक सप्ताह तक कड़ी पाबंदियों की वजह से फैक्ट्रियों में काम बंद था, लेकिन 15 अगस्त के आस-पास दोबारा से काम पुराने ढर्रे पर ही चलने लगा है।
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यहां का तैयार माल गुजरात, जालंधर, अमृतसर, जम्मू-कश्मीर के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में भी भेजा जाता है। फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि यहां बैट बनाने के काम में अनंतनाग, बिजबिहाड़ा, पुलवामा, शोपियां तथा श्रीनगर के कारीगर लगे हुए हैं। शुरुआत में थोड़ी दिक्कत आई, लेकिन अब सब कुछ सामान्य है।
कारीगर आने लगे हैं और काम पहले की ही तरह चल पड़ा है। इनका कहना है कि फैक्ट्री को बंद नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे न केवल फैक्ट्री संचालकों बल्कि हजारों कारीगरों का परिवार भी जुड़ा हुआ है। यदि एक बार फैक्ट्री बंद की गई तो फिर कारीगर मिलने बंद हो जाएंगे। ऑर्डर मिलना बंद हो जाएगा। मार्केट के शिफ्ट होने का खतरा है। भेजे गए माल का पेमेंट मिलने में भी दिक्कतें आएगी।
हालमुला के फैक्ट्री संचालक गुलजार अहमद का कहना है कि उसके पास फिलहाल 9 हजार बैट तैयार हैं। काम अब भी बंद नहीं है। कई जगहों से ऑर्डर मिले हुए हैं जिन्हें पूरा करना जरूरी है। समस्या केवल तैयार माल को भेजने की है।
वर्ष 2016 में जब हिजबुल आतंकी बुरहान वानी मारा गया था तो उस दौरान भड़की हिंसा में भी यह कारोबार बंद नहीं हुआ था। इलाके की अन्य फैक्ट्रियों में भी उत्पादन चल रहा है। पास में ही बिजबिहाड़ा में सिक़ॉप परिसर में भी कुछ फैक्ट्रियां हैं जहां बैट बनाने का काम चल रहा है।
कम्युनिकेशन न होने से माल की सप्लाई नहीं हो पा रही
फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि बस केवल दिक्कत कम्युनिकेशन की है। आखिर माल किसे भेजा जाए। जिस पार्टी ने माल का आर्डर दिया है उसे सप्लाई की जानकारी टेलीफोन सुविधा न होने की वजह से नहीं दिया जा सका। कुछ लैंडलाइन फोन बहाल हुए हैं। लेकिन अब भी ज्यादातर फोन बंद हैं। ऐसे में पार्टी से बात नहीं हो पा रही है। बिना बात किए माल भेजने पर पेमेंट फंसने का खतरा है। उम्मीद है अगले कुछ दिनों में यह परेशानी भी दूर हो जाएगी।