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कुरैशी-मीरवायज वार्ता पर भारत की प्रतिक्रिया से भारत पाक संबंध बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंचा: महबूबा
Thu, 31 Jan 2019 06:53 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Thu, 31 Jan 2019 06:53 PM IST
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- फोटो : फाइल
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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज पाकिस्तान व भारत के रिश्ते अविश्सनीय रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। चुनावी राजनीति की बाध्यताओं से संचालित विदेश नीति बिल्कुल निराशाजनक है। उनकी यह टिप्पणी पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक के बीच टेलीफोन से बातचीत पर भारत की प्रतिक्रिया के बाद आई है।
महबूबा ने वीरवार को कई ट्वीट किए कि दोनों देशों के बीच संबंध बिल्कुल निचले स्तर पर चला गया है। इस बातचीत को भारत विरोधी करार देने से रिश्ते अविश्वसनीय रूप से नीचे चले गए हैं। अतीत में पाकिस्तानी अधिकारियों और राज्य के हुर्रियत नेताओं के बीच हुए संवादों का जिक्र करते हुए कहा कि विडंबना यह है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की अगुवाई वाला राजग ही था जिसने न केवल हुर्रियत नेताओं और पाकिस्तानी गणमान्य व्यक्तियों के बीच मुलाकात करवाया बल्कि उन्हें (हुर्रियत नेताओं) तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ समेत पाकिस्तान के तत्कालीन सत्ता प्रतिष्ठान के लोगों से बातचीत करने के लिए वहां जाने दिया।
क्या है मामला
विदेश सचिव विजय गोखले ने बुधवार को पाकिस्तान के दूत सुहैल महमूद को तलब किया था और कहा था कि मीरवाइज के साथ कुरैशी की बातचीत भारत की एकता पर प्रहार का खुल्लम खुल्ला प्रयास है। यह उसकी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान के उच्चायुक्त को सावधान किया गया कि लगातार ऐसे करने के गंभीर परिणाम होंगे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि कुरैैशी ने हुर्रियत नेता मीरवाइज से बातचीत की और उन्हें कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही कोशिश के बारे में बताया।
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महबूबा ने वीरवार को कई ट्वीट किए कि दोनों देशों के बीच संबंध बिल्कुल निचले स्तर पर चला गया है। इस बातचीत को भारत विरोधी करार देने से रिश्ते अविश्वसनीय रूप से नीचे चले गए हैं। अतीत में पाकिस्तानी अधिकारियों और राज्य के हुर्रियत नेताओं के बीच हुए संवादों का जिक्र करते हुए कहा कि विडंबना यह है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की अगुवाई वाला राजग ही था जिसने न केवल हुर्रियत नेताओं और पाकिस्तानी गणमान्य व्यक्तियों के बीच मुलाकात करवाया बल्कि उन्हें (हुर्रियत नेताओं) तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ समेत पाकिस्तान के तत्कालीन सत्ता प्रतिष्ठान के लोगों से बातचीत करने के लिए वहां जाने दिया।
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क्या है मामला
विदेश सचिव विजय गोखले ने बुधवार को पाकिस्तान के दूत सुहैल महमूद को तलब किया था और कहा था कि मीरवाइज के साथ कुरैशी की बातचीत भारत की एकता पर प्रहार का खुल्लम खुल्ला प्रयास है। यह उसकी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान के उच्चायुक्त को सावधान किया गया कि लगातार ऐसे करने के गंभीर परिणाम होंगे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि कुरैैशी ने हुर्रियत नेता मीरवाइज से बातचीत की और उन्हें कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही कोशिश के बारे में बताया।
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