BJP से हाथ मिलाने को तैयार नेशनल कॉन्फ्रेंस
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रियासत में सरकार के गठन को लेकर सरगर्मियां एकाएक तेज हो गईं हैं। पीडीपी अध्यक्ष सांसद महबूबा मुफ्ती ने रविवार को पीडीपी कोर ग्रुप की बैठक बुलाई है।
माना जा रहा है कि इसमें नयी सरकार के गठन के लिए भाजपा के साथ गठबंधन पर मंथन होगा। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख डा. फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा के साथ गठबंधन के लिए तैयार होने की बात कहकर सियासी पारा चढ़ा दिया।
यही नहीं उन्होंने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल एनएन वोहरा से मुलाकात की और राज्य के राजनीतिक हालात पर चिंता जताई। उन्होंने जल्द से जल्द लोकतांत्रिक सरकार के गठन पर जोर दिया। भाजपा ने भी एक बैठक कर हालात पर चर्चा की।
भाजपा के साथ गठबंधन पर नेकां कर सकती है विचार
डा. अब्दुल्ला ने अमर उजाला से कहा कि पीडीपी और भाजपा को सरकार बनाने का जनादेश मिला है। उन्हें सरकार बनाकर जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना चाहिए। यदि वे सरकार नहीं बना पाते हैं तो पार्टी इस दिशा में विचार कर सकती है।
इस संबंध में पार्टी हाईकमान विचार करेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा के साथ सरकार बना सकते हैं, उन्होंने कहा कि राजनीति में रास्ते बंद नहीं रहते, विकल्प खुले हैं।
उन्होंने कहा कि पहले तो गठबंधन की तारीफ में कसीदे काढ़े जाते रहे, अब क्या हो गया। शर्तें थोपने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि महबूबा के पिता ने हुकूमत बनाई थी तो उस पर आगे बढ़कर काम करना चाहिए।
'राजनीतिक अस्थिरता राज्य के लिए अच्छी नहीं'
वहीं कटड़ा में पत्रकारों से फारूक ने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता राज्य के लिए अच्छा नहीं है। इस स्थिति का दुश्मन फायदा उठा सकते हैं।
मुफ्ती मोहम्मद सईद ने दो पार्टियों के बीच गठबंधन तय किया था तो अब उनकी पुत्री का फर्ज बनता है कि वे इस दोस्ती को आगे बढ़ाएं। पीडीपी-भाजपा को जल्द से जल्द सरकार गठन कर अस्थिरता के माहौल को खत्म करना चाहिए।
दोनों अपने अपने मतभेदों को कम कर रियासत को अनिश्चितता के दौर से उबारें। कहा कि नेकां कभी भी अपनी भूमिका से भागती नहीं है। 1996 में जब कोई चुनाव के लिए तैयार नहीं था तो पार्टी इसके लिए आगे आई थी। ज्ञात हो कि नेशनल कांफ्रेंस पहले भी राजग के साथ सरकार में रही है।
भाजपा को पीडीपी के फैसले का इंतजार
पीडीपी की ओर से रविवार को बैठक बुलाए जाने की सूचना के बाद भाजपा ने भी शनिवार की शाम बैठक कर राजनीतिक हालात पर चर्चा की।
सूत्रों के अनुसार बैठक में यह तय किया गया कि पीडीपी की बैठक में क्या फैसला होता है, इस पर नजर रखी जाए। इसके साथ ही उनके कदम के बाद अन्य विकल्पों पर विचार किया जाए।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा, सांसद जुगल किशोर शर्मा, पूर्व डिप्टी सीएम डा. निर्मल सिंह, पूर्व मंत्री बाली भगत तथा प्रदेश महासचिव संगठन अशोक कौल मौजूद थे। सूत्रों ने बताया कि पार्टी हाईकमान अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
कांग्रेस नेता भी हुए सक्रिय
कांग्रेस सारे घटनाक्रम पर प्रकटत: खामोश है, लेकिन सूत्रों की मानें तो पार्टी के प्रमुख नेता इन दिनों बेहद सक्रिय हो उठे हैं।
मुफ्ती के चहारूम पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आने और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के सीपीआई एम के विधायक मुहम्मद युसूफ तारिगामी और हकीम यासिन के साथ बिजबिहाड़ा में मुफ्ती की कब्र पर जाने से गैर-भाजपा गठबंधन की चर्चाओं ने जो जोर पकड़ा था उसे भी राजनीतिक जानकार अभी खारिज नहीं कर रहे हैं।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस कुछ निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में कर नई सरकार के गठन की दिशा में पीडीपी के साथ हाथ मिला सकती है।
निर्दलीय होंगे किंगमेकर
पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन से विधानसभा में सदस्यों की संख्या 86 रह गई है। इसमें पीडीपी के 27, भाजपा-25, नेकां-15, कांग्रेस-12, सीपीआई एम-1, पीडीएफ-1 और निर्दलीय-5 हैं।
सूत्रों का कहना है कि पीडीपी और कांग्रेस का गठबंधन बना तो सीपीआई एम के मुहम्मद युसूफ तारिगामी, पीडीएफ के हकीम यासिन, इंजीनियर राशिद, जंस्कार के विधायक सैय्यद मुहम्मद वाकिर रिजवी साथ आ सकते हैं।
इसके साथ ही एक अन्य निर्दलीय विधायक पर भी डोरे डाले जा रहे हैं। यह निर्दलीय विधायक ही सरकार की कुंजी होंगे। उक्त विधायक अपने आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए जाने से खासे नाराज बताए जाते हैं।