नेकां और कांग्रेस की दुश्मनी फिर दोस्ती में बदली
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सियासत में कोई किसी का स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। इस पंक्ति को सही साबित करते हुए नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस में निकटता बढ़ने लगी है। नेकां यूपीए का घटक दल था और कांग्रेस के साथ जम्मू कश्मीर में छह साल तक सरकार चलाई।
विधानसभा चुनाव से ऐन पहले दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए और परस्पर तलवारबाजी तेज हुई। चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस ने पीडीपी की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया लेकिन पीडीपी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब राज्यसभा की कम से कम एक सीट हासिल करने के लिए नेकां-कांग्रेस में फिर से खिचड़ी पकने लगी है।
रणनीति के तहत कम से कम एक सीट जीतने की योजना की व्यूरचना हो रही है। कांग्रेस के पास 12 और नेकां के पास 15 सीटें हैं। दोनों दलों को तीन निर्दलीय का समर्थन आसानी से हासिल हो जाएगा। इस तरह आंकड़ा तीस पर पहुंचता है जो एक सीट पर फतह हासिल करने के लिए काफी है।
नेकां इस समीकरण के तहत अपना प्रत्याशी जीतना चाहती है जबकि कांग्रेस का जोर गुलाम नबी आजाद के लिए है। दरअसल भाजपा और पीडीपी के गठबंधन में हो रही देर ने नेकां और कांग्रेस को उत्साहित किया है। राज्यसभा का चुनाव 7 फरवरी को होना है और इसके लिए बुधवार को अधिसूचना जारी हो सकती है।
इस कारण से फेल हो सकती है नेकां और कांग्रेस के योजना
पिछली बार नेकां के जी एन रतनपुरी और मोहम्मद शफी तथा कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इस बार अंकगणित विपरीत है। पीडीपी को 28 सीटें और भाजपा के पास 25 सीटें हैं। अगर चुनाव से पहले भाजपा-पीडीपी गठबंधन तय कर लेते हैं तो कांग्रेस-नेकां की योजना फेल हो जाएगी।
राज्यसभा की चार सीटों के लिए तीन बार मतदान होंगे। पहली और दूसरी सीट के लिए दो अलग-अलग चुनाव होंगे जबकि तीसरी और चौथी सीट के लिए एक बार वोट डाले जा सकेंगे। भाजपा-पीडीपी गठबंधन की स्थिति में दोनों दलों के पास 53 सीटें होंगी।
सभी चार सीटों पर कब्जे के लिए इस गठबंधन को निर्दलीय और अन्य के खाते से छह वोट का इंतजाम करना पड़ेगा। दो सीटों पर आसान जीत के बाद दोनों तीसरी और चौथी सीट के लिए 30 और 29 वोट तय कर सकते हैं। उस स्थिति में नेकां-कांग्रेस के पास 28 वोट से अधिक जुटा पाना मुश्किल होगा। इस बाजी भाजपा -पीडीपी के पक्ष में जा सकती है।
गठबंधन के नहीं होने पर समीकरण उलट-पुलट हो जाएंगे
लेकिन इस गठबंधन के नहीं होने पर समीकरण उलट-पुलट हो जाएंगे। अगर नेकां, कांग्रेस, पीडीपी और चार निर्दलीय तालमेल करते हैं तो यह गठबंधन सभी चार सीटें ले जाएगा और भाजपा के खाते में शून्य सीट होगी।
नेकां और कांग्रेस के अलग-अलग लड़ने पर भाजपा-पीडीपी की राह आसान होगी लेकनि अगर सभी दल अलग-अलग लड़ते हैं तो परिणाम चौकाने वाले होंगे। एक सीट पर जीत के लिए कम से कम तीस वोट चाहिए। ऐसी स्थिति में निर्दलीय और अन्य दलों का महत्ल बढ़ जाएगा।
भाजपा से हो रही बात : पीडीपी
पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा से बातचीत हो रही है। दोनों दल राज्यसभा में दो-दो सीटें हासिल करने के लिए रणनीति तय कर सकते हैं।