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Jammu News: सियासत में टोपियों का खेल, गिरगिट भी फेल
Mon, 21 Aug 2023 01:21 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 21 Aug 2023 01:21 AM IST
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संडे थिएटर सीरीज के तहत नटरंग की ओर से हुआ नाटक का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग ने संडे थिएटर सीरीज के तहत रविवार को स्टूडियो में मणि मधुकर द्वारा लिखित राजनीतिक व्यंग टोपियां नाटक का मंचन किया। इसका निर्देशन नीरज कांत ने किया। यह नाटक उन राजनेताओं पर कटाक्ष है, जो सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए गिरगिट से भी तेजी से रंग बदलते हैं। उनका मिशन जनता को मूर्ख बनाना होता है और इसके लिए वे स्थिति व आवश्यकता अनुसार खुद को किसी भी रंग या पोशाक में बदलने की कला में माहिर हैं। दुर्भाग्य यह है कि उन्हीं चेहरों ने असली को नए मुखौटों में छिपाकर सत्ता तक अपनी जगह बना ली है। वे अपनी टोपी का रंग बदल रहे हैं, अपनी मानसिकता नहीं।
कहानी की पृष्ठभूमि में राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का संकल्प लेने वाले दो पड़ोसियों को विकल्प तलाशते हुए दिखाया गया। हर बार वे अलग-अलग टोपी और पोशाक पहने लोगों से मिलते हैं, जो उन्हें कई प्रकार के घोषणापत्र देते हैं। हर बार वे उन्हें एक अलग व्यक्ति के रूप में देखते हैं और उनसे एक अलग विचारधारा की अपेक्षा करते हैं। इस तरह वे उसकी रणनीति के आगे झुक जाते हैं। समय के साथ जब उन्हें लगता है कि कुछ भी नहीं बदल रहा है, तो समाजवाद के नारे अमीर और गरीब के बीच विभाजन को आगे बढ़ा रहे हैं। जीवन की गुणवत्ता दिन-ब-दिन गिरती जा रही है और जीवन और संपत्ति की सुरक्षा भगवान की दया पर निर्भर है। दोनों हिम्मत जुटाते हैं और उन सपनों को बेचने वाले को नंगा कर देते हैं। हैरानी की बात यह है कि कपड़ों के अंदर उन्हें पता चलता है कि वह वही व्यक्ति है और हर बार अलग-अलग पोशाक में उनके पास आता था।
नाटककार ने सफलतापूर्वक चित्रित किया कि राजनेता एक ही हैं, वे केवल जनता को बेवकूफ बनाने के लिए अपनी टोपी और रंग बदलते हैं। वे एक ही समय में दोस्त और दुश्मन हो सकते हैं। सत्ता की लालसा के लिए उनके समीकरण और टकराव बदल जाते हैं। दो पड़ोसियों की भूमिकाएं अभिमन्यु चौधरी और सुमित बंदराल ने निभाईं, जबकि वेदांत सूरी ने उन्हें बराबर समर्थन दिया। नाटक की लाइटिंग नीरज कांत ने किया और नाटक का संगीत चिराग आनंद ने प्रस्तुत किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग ने संडे थिएटर सीरीज के तहत रविवार को स्टूडियो में मणि मधुकर द्वारा लिखित राजनीतिक व्यंग टोपियां नाटक का मंचन किया। इसका निर्देशन नीरज कांत ने किया। यह नाटक उन राजनेताओं पर कटाक्ष है, जो सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए गिरगिट से भी तेजी से रंग बदलते हैं। उनका मिशन जनता को मूर्ख बनाना होता है और इसके लिए वे स्थिति व आवश्यकता अनुसार खुद को किसी भी रंग या पोशाक में बदलने की कला में माहिर हैं। दुर्भाग्य यह है कि उन्हीं चेहरों ने असली को नए मुखौटों में छिपाकर सत्ता तक अपनी जगह बना ली है। वे अपनी टोपी का रंग बदल रहे हैं, अपनी मानसिकता नहीं।
कहानी की पृष्ठभूमि में राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का संकल्प लेने वाले दो पड़ोसियों को विकल्प तलाशते हुए दिखाया गया। हर बार वे अलग-अलग टोपी और पोशाक पहने लोगों से मिलते हैं, जो उन्हें कई प्रकार के घोषणापत्र देते हैं। हर बार वे उन्हें एक अलग व्यक्ति के रूप में देखते हैं और उनसे एक अलग विचारधारा की अपेक्षा करते हैं। इस तरह वे उसकी रणनीति के आगे झुक जाते हैं। समय के साथ जब उन्हें लगता है कि कुछ भी नहीं बदल रहा है, तो समाजवाद के नारे अमीर और गरीब के बीच विभाजन को आगे बढ़ा रहे हैं। जीवन की गुणवत्ता दिन-ब-दिन गिरती जा रही है और जीवन और संपत्ति की सुरक्षा भगवान की दया पर निर्भर है। दोनों हिम्मत जुटाते हैं और उन सपनों को बेचने वाले को नंगा कर देते हैं। हैरानी की बात यह है कि कपड़ों के अंदर उन्हें पता चलता है कि वह वही व्यक्ति है और हर बार अलग-अलग पोशाक में उनके पास आता था।
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नाटककार ने सफलतापूर्वक चित्रित किया कि राजनेता एक ही हैं, वे केवल जनता को बेवकूफ बनाने के लिए अपनी टोपी और रंग बदलते हैं। वे एक ही समय में दोस्त और दुश्मन हो सकते हैं। सत्ता की लालसा के लिए उनके समीकरण और टकराव बदल जाते हैं। दो पड़ोसियों की भूमिकाएं अभिमन्यु चौधरी और सुमित बंदराल ने निभाईं, जबकि वेदांत सूरी ने उन्हें बराबर समर्थन दिया। नाटक की लाइटिंग नीरज कांत ने किया और नाटक का संगीत चिराग आनंद ने प्रस्तुत किया।
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