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जेहाद करना है तो फलस्तीन चले जाएं पाकिस्तानी पीएम, कश्मीर मसला हमारा आंतरिक मामला: नसीरुद्दीन चिश्ती
Tue, 15 Oct 2019 12:06 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 15 Oct 2019 12:06 AM IST
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नसीरुद्दीन चिश्ती
- फोटो : ANI
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कश्मीर में अमन के मिशन पर पहुंचे देश के उलेमाओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर निशाना साधते हुए उन्हें जेहाद शब्द से परहेज करने की सलाह देते हुए कहा कि अगर उन्हें जेहाद करनी है तो वह फलस्तीन चले जाएं।
ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन कॉउंसिल के चेयरमैन व अजमेर शरीफ दरगाह के मुख्य इमाम के बेटे मौलाना सैयद नसीरूदीन चिश्ती ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पिछले कुछ दिनों में खास तौर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जिस प्रकार जेहाद शब्द का इस्तेमाल किया है वह नाकाबिले बर्दाश्त है। दो मुल्क के राजनीतिक मामलों या दुनियावी मामलों में जेहाद शब्द का इस्तेमाल कर लोगों की भावनाओं से खेलना एक मुसलमान को शोभा नहीं देता।
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उन्होंने कहा, घाटी में जो कुछ हो रहा है यह कोई जेहाद नहीं है। इमरान चीन में मुसलमानों पर हो रहे जुल्म को देखें। कश्मीर का मसला हमारा आंतरिक मामला है जिसमें किसी को दखल देने की इजाजत नहीं है। यहां के मुसलमान खुशहाल तरीके से रह रहे हैं और खुद रहनुमाई करने के लायक हैं। हमें बाहर के किसी मुसलमान की रहनुमाई नहीं चाहिए।
चिस्ती ने कहा कि हम पाकिस्तान से यह कहना चाहते हैं कि वह जेहाद के नाम पर इस्लाम का सहारा लेते हुए लोगों की भावनाओं को न भड़काए और न ही दुनियावी मसलों को इस्लाम के साथ जोड़े।
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ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन कॉउंसिल के चेयरमैन व अजमेर शरीफ दरगाह के मुख्य इमाम के बेटे मौलाना सैयद नसीरूदीन चिश्ती ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पिछले कुछ दिनों में खास तौर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जिस प्रकार जेहाद शब्द का इस्तेमाल किया है वह नाकाबिले बर्दाश्त है। दो मुल्क के राजनीतिक मामलों या दुनियावी मामलों में जेहाद शब्द का इस्तेमाल कर लोगों की भावनाओं से खेलना एक मुसलमान को शोभा नहीं देता।
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उन्होंने कहा, घाटी में जो कुछ हो रहा है यह कोई जेहाद नहीं है। इमरान चीन में मुसलमानों पर हो रहे जुल्म को देखें। कश्मीर का मसला हमारा आंतरिक मामला है जिसमें किसी को दखल देने की इजाजत नहीं है। यहां के मुसलमान खुशहाल तरीके से रह रहे हैं और खुद रहनुमाई करने के लायक हैं। हमें बाहर के किसी मुसलमान की रहनुमाई नहीं चाहिए।
चिस्ती ने कहा कि हम पाकिस्तान से यह कहना चाहते हैं कि वह जेहाद के नाम पर इस्लाम का सहारा लेते हुए लोगों की भावनाओं को न भड़काए और न ही दुनियावी मसलों को इस्लाम के साथ जोड़े।
मालूम हो कि इस 15 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल में देश की विभिन्न दरगाहों के धर्म गुरु व प्रमुख शामिल हैं। जिसका नेतृत्व मौलाना सैयद नसीरूदीन चिश्ती कर रहे हैं। प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि वह कश्मीर में एक अंतरराष्ट्रीय सूफी सेंटर स्थापित करना चाहते हैं कि जिसके चलते घाटी रिलीजियस टूरिज्म के नक्शे पर उभर कर सामने आए। घाटी में 5 अगस्त को पाबंदियां लगाए जाने के बाद यह पहला ऐसा प्रतिनिधि मंडल है जिसे राज्य सरकार ने यहां आने और लोगों से मिलने की भी इजाजत दी है।
बातचीत से सुलझाएं विवाद
ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन कॉउंसिल के चेयरमैन नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा है कि कश्मीर में सभी पक्षों के अपने विवाद बातचीत के जरिए एक दूसरे का सम्मान करते हुए सुलझाए जाने चाहिए। सूफी काउंसिल जम्मू कश्मीर की समृद्धि के लिए सेतु का काम करेगी।
सरकार को सौंपेंगे रिपोर्ट
उन्होंने कहा कि अपने दौरे के दौरान उन्होंने विभिन्न दरगाहों का दौरा किया और लोगों से बातचीत की। इससे जमीनी हालात का पता चला। अब वह कश्मीर की स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि वह उन बच्चों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं जो डॉक्टर बनना चाहते हैं। पाबंदियों के कारण जिन बच्चों को पढ़ाई का नुकसान पहुंचा है हम उसमें मदद के लिए तैयार हैं।
बातचीत से सुलझाएं विवाद
ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन कॉउंसिल के चेयरमैन नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा है कि कश्मीर में सभी पक्षों के अपने विवाद बातचीत के जरिए एक दूसरे का सम्मान करते हुए सुलझाए जाने चाहिए। सूफी काउंसिल जम्मू कश्मीर की समृद्धि के लिए सेतु का काम करेगी।
सरकार को सौंपेंगे रिपोर्ट
उन्होंने कहा कि अपने दौरे के दौरान उन्होंने विभिन्न दरगाहों का दौरा किया और लोगों से बातचीत की। इससे जमीनी हालात का पता चला। अब वह कश्मीर की स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि वह उन बच्चों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं जो डॉक्टर बनना चाहते हैं। पाबंदियों के कारण जिन बच्चों को पढ़ाई का नुकसान पहुंचा है हम उसमें मदद के लिए तैयार हैं।