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Narco Terrorism : सेना के पोर्टर के रूप में नारको आतंकवाद नेटवर्क चला रहे थे तीन आरोपी, हॉटस्पॉट बना करनाह
Fri, 13 Oct 2023 11:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 13 Oct 2023 11:52 AM IST
सार
इस नेटवर्क को चलाने में गिरफ्तार कुपवाड़ा के पांच नशा तस्करों में तीन सेना के पोर्टर हैं, जो नारको आतंकवाद को चला रहे थे। डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि कुपवाड़ा के करनाह अमरोही रूट से पिछले दो सालों से 12 मामले नारको आतंकवाद के सामने आए हैं।
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नशे की खेप और हथियार बरामद
- फोटो : संवाद
विस्तार
रामबन पुलिस द्वारा ध्वस्त नारको आतंकवाद नेटवर्क मामले में एक बड़ी जानकारी सामने आई है। इस नेटवर्क को चलाने में गिरफ्तार कुपवाड़ा के पांच नशा तस्करों में तीन सेना के पोर्टर हैं, जो नारको आतंकवाद को चला रहे थे। इनमें बशीर अहमद, नजीर अहमद और कलामदीन शामिल हैं। यह एलओसी पर करनाह गांव में रहते हैं। यह गांव सीमा के दोनों तरफ है। इस वजह से इस पार से उस पार आना जाना आम है। संपर्क के लिए भी मोबाइल फोन या किसी बड़े संचार नेटवर्क की आवश्यकता नहीं है।
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गिरफ्तार तीनों आरोपियों के रिश्तेदार उस पार भी हैं। उन्हीं रिश्तेदारों में से कुछ ने इनको आतंकी हैंडलरों के संपर्क में लाया। इसके बाद यह उनके लिए नशा तस्करी का काम करने लगे। यह तीनों सेना के लिए पोर्टर का काम करते थे, ताकि किसी को शक न हो। इसका लाभ उठाते हुए इन्होंने अपने साथ कौफील और सफीर को भी जोड़ा, जबकि पंजाब के मुल्लांपुर दाखा के रहने वाले अपने रिश्तेदार मोहम्मद शफी से भी बात की। वहीं से शफी ने मंजीत सिंह और मंजीत सिंह ने अपने साथियों सरबजीत सिंह और हनी बसरा से बात की। वह अब तक तीन खेपें कुपवाड़ा से रिसीव कर चुके हैं, जिन्हें पंजाब के अलावा मुंबई और अन्य राज्यों में दी हैं।
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नारको आतंकवाद का हॉटस्पॉट करनाह
डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि कुपवाड़ा के करनाह अमरोही रूट से पिछले दो सालों से 12 मामले नारको आतंकवाद के सामने आए हैं। यह गांव सीमा पर है। दोनों तरफ लोगों का आना जाना है। इनका आपस में संपर्क करना भी आसान है। इस वजह से सीमा पार से इस रूट से बड़े स्तर पर नशे की खेप आ रही है। इस पर अंकुश के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है।
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फर्जी नंबर प्लेटों का खेल
बता दें कि आरोपियों के पास से 38 फर्जी नंबर प्लेट मिली हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ नंबर की नंबर प्लेट हैं। बताया जा रहा है कि जिस वाहन से कुपवाड़ा से खेप लाई जाती थी, उस वाहन में कुपवाड़ा से पंजाब पहुंचने तक 13 से 16 अलग-अलग नंबर प्लेट इस्तेमाल किया जाता था, ताकि यदि किसी को शक हो भी जाए तो कुछ ही किलोमीटर के बाद उसका नंबर बदल दिया जाए। कोई पीछा करता भी है, तो उसे उस नंबर का वाहन नहीं दिखाई देगा। यही कारण है कि यह नशा तस्कर लंबे समय से इन फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल कर रहे थे।
फर्जी पासपोर्ट पर मंजीत का पिता विदेश भागा
जांच में यह भी पता चला है कि नशा तस्कर मंजीत सिंह का पिता सतनाम सिंह भी नशा तस्कर रहा है। वह फर्जी पासपोर्ट पर विदेश भाग गया है। सतनाम सिंह ही मंजीत से नशे का नेटवर्क चलवा रहा था। इसके लिए विदेश से फंड्स भेजने का काम सतनाम कर रहा था। मंजीत सिंह के पास से विदेश में लेनदेन के कई दस्तावेज मिले हैं।