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Jammu News: नारको आतंकवाद नेटवर्क के संचालक बैंक मैनेजर की जमानत अर्जी खारिज
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-सीमा पार से हेरोइन मंगवाकर लश्कर के लिए चलाता था नेटवर्क
जम्मू। एनआईए की विशेष अदालत जम्मू के न्यायाधीश संदीप गंडोत्रा ने नारको आतंकवाद मामले के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। हंदवाड़ा सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अफाक अहमद वानी ने अर्जी थी। इस पर हंदबाड़ा पुलिस स्टेशन में 15 नवंबर 2023 को करोड़ों की नकदी और हेरोइन मामले में केस दर्ज हुआ था। बैंक मैनेजर सीमा पार से हेरोइन मंगाता था। आतंकी संगठन लश्कर के लिए काम करता था। वह नेटवर्क का मुख्य सरगना था।
सोमवार को मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने दोनों तरफ की दलीलें सुनीं। कहा कि रिकॉर्ड में उपलब्ध सामग्री से पता चलता है कि अपीलकर्ता आतंकी संगठनों के सदस्यों की ओर से समर्थित आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में शामिल था। यही कारण है कि इसके दो साथी जांच के दौरान एक मुठभेड़ में मारे गए थे। मुकदमे में देरी का आधार जमानत देने के लिए काफी नहीं, क्योंकि आरोप गंभीर हैं।
अपराध की प्रकृति और गंभीरता रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य और राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वह जमानत का हकदार नहीं है। क्योंकि न केवल सरकारी गवाह शौकत अहमद पर्रे, बल्कि अदालत में जांचे गए अन्य गवाहों ने भी अदालत में अपने बयानों में आवेदक के खिलाफ कहा है। वह किसी तरह की छूट का हकदार नहीं हैं। यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो सार्वजनिक हित और प्रदेश के हित दांव पर लग जाएंगे। ब्यूरो
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ये है मामला
दरअसल, 2020 में हंदबाड़ा में पुलिस ने बेमिना श्रीनगर के अब्दुल मोमीन मीर को गिरफ्तार किया। उनकी कार से 21 किलो हेरोइन व सबा करोड़ की नकदी बरामद हुई थी। मामले की जांच एनआईए कर रही थी। जांच में सामने आया कि मोमीन बैंक मैनेजर के लिए काम करता था। करीब 3 वर्ष की जांच के बाद बैंक मैनेजर पर एनआईए ने केस दर्ज कर इसे गिरफ्तार किया।
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जम्मू। एनआईए की विशेष अदालत जम्मू के न्यायाधीश संदीप गंडोत्रा ने नारको आतंकवाद मामले के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। हंदवाड़ा सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अफाक अहमद वानी ने अर्जी थी। इस पर हंदबाड़ा पुलिस स्टेशन में 15 नवंबर 2023 को करोड़ों की नकदी और हेरोइन मामले में केस दर्ज हुआ था। बैंक मैनेजर सीमा पार से हेरोइन मंगाता था। आतंकी संगठन लश्कर के लिए काम करता था। वह नेटवर्क का मुख्य सरगना था।
सोमवार को मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने दोनों तरफ की दलीलें सुनीं। कहा कि रिकॉर्ड में उपलब्ध सामग्री से पता चलता है कि अपीलकर्ता आतंकी संगठनों के सदस्यों की ओर से समर्थित आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में शामिल था। यही कारण है कि इसके दो साथी जांच के दौरान एक मुठभेड़ में मारे गए थे। मुकदमे में देरी का आधार जमानत देने के लिए काफी नहीं, क्योंकि आरोप गंभीर हैं।
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अपराध की प्रकृति और गंभीरता रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य और राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वह जमानत का हकदार नहीं है। क्योंकि न केवल सरकारी गवाह शौकत अहमद पर्रे, बल्कि अदालत में जांचे गए अन्य गवाहों ने भी अदालत में अपने बयानों में आवेदक के खिलाफ कहा है। वह किसी तरह की छूट का हकदार नहीं हैं। यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो सार्वजनिक हित और प्रदेश के हित दांव पर लग जाएंगे। ब्यूरो
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ये है मामला
दरअसल, 2020 में हंदबाड़ा में पुलिस ने बेमिना श्रीनगर के अब्दुल मोमीन मीर को गिरफ्तार किया। उनकी कार से 21 किलो हेरोइन व सबा करोड़ की नकदी बरामद हुई थी। मामले की जांच एनआईए कर रही थी। जांच में सामने आया कि मोमीन बैंक मैनेजर के लिए काम करता था। करीब 3 वर्ष की जांच के बाद बैंक मैनेजर पर एनआईए ने केस दर्ज कर इसे गिरफ्तार किया।