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Jammu News: नगर निगम ढो रहा 15 साल पुराने वाहनों का भार, बेड़े से 50 होंगे बाहर
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- शहर में सफाई व्यवस्था पर फिर संकट के बादल, नए खरीदने के लिए अभी प्रस्ताव ही भेजा
- 20 और वाहन कंडम, अगले साल ये भी हटाए जाएंगे
- 150 से ज्यादा वाहन निगम के पास मौजूदा समय में
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मंदिरों के शहर में सफाई व्यवस्था पर फिर संकट के बादल छाने लगे हैं। नगर निगम सफाई के लिए लगाए गए 15 साल पुराने वाहनों को बेड़े से बाहर करने की तैयारी में है। अक्तूबर तक कंडम हो चुके 50 वाहन हटा दिए जाएंगे। इसके अलावा 20 और वाहन अगले साल 15 वर्ष की मियाद पूरी कर रहे हैं, इन्हें भी निकाला जाएगा। सरकारी आदेश के अनुसार 15 साल पुराने वाहन को चलाया नहीं जा सकता। ऐसे में नगर निगम इनको बाहर करेगा। नए वाहन खरीदने के लिए अभी नगर निगम ने सरकार को प्रस्ताव ही भेजा है, जिसके लिए मंजूरी नहीं मिल पाई है।
मौजूदा समय में नगर निगम के पास 150 से ज्यादा वाहन हैं। इसमें 30 के करीब टिप्पर, 12 जेसीबी, छह पोकलेन मशीनों के अलावा वाटर टैंकर, वाटर स्प्रिंकलर और अन्य वाहन हैं। इनमें 50 ऐसे हैं जो 15 साल पूरे कर चुके हैं। इसमें पांच टिप्पर, दो जेसीबी और एक पोकलेन भी मशीन है।
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नगर निगम को अब तक नए वाहन नहीं मिल पाए : नवंबर से नगर निगम को किराये पर वाहन मुहैया करने पड़ेंगे। अधिकारियों के अनुसार सफाई के साथ अन्य काम सुचारू रूप से चलाने के लिए निजी वाहनों को किराये पर लेना ही अंतिम विकल्प होगा। क्योंकि नए वाहन खरीदने के लिए अभी तक सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। पहले ही शहर में वाहन कम होने के कारण सफाई सही तरीके से नहीं हो पा रही है। सुबह वार्डों से कचरा उठाने के बाद दूसरे दिन ही डंपिंग साइट साफ हो पा रही हैं। मौजूदा समय में 30 के करीब टिप्पर हैं, लेकिन 75 की जरूरत है। 12 जेसीबी की जगह 30 चाहिए। इससे वार्डों में डंपिंग साइट की सफाई दिन में दो समय हो सकेेगी। मौजूदा समय में कुछ ऐसी भी डंपिंग साइट हैं, जिनकी सफाई दो-दो दिन बाद हो रही है।
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400 एमटी कचरा हर रोज
लगाना पड़ रहा ठिकाने
वाहनों के माध्यम से शहर में 400 मीट्रिक टन कचरा हर रोज उठाना पड़ रहा है। डंपिंग साइट से कचरा कोट भलवाल तक पहुंचाया जाता है। वाहनों के अभाव में कचरा ठिकाने लगाने में परेशानी आ सकती है। 50 से ज्यादा वाहन काफी कंडम हो चुके हैं। कुछ में कचरा लोड करने के बाद सड़कों पर बिखरता जाता है। तिरपाल लगाकर इसे डंपिंग साइट तक पहुंचाना पड़ रहा है।
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पुराने वाहनों से कचरा उठाने में आ रहा ज्यादा खर्च
नगर निगम को 400 मीट्रिक टन कचरा ठिकाने लगाने में 28 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा खपत पुराने वाहनों से हो रही है। एक लीटर डीजल में तीन से चार किलोमीटर सफर ही तय हो पा रहा है। हर रोज डंपिंग साइट से कोट भलवाल तक आने-जाने में तीस किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में औसतन दस लीटर डीजल की खपत हो रही है। नगर निगम के पास 70 के करीब पुराने वाहन हैं। अभी तक इन्हीं वाहनों के माध्यम से कचरा एकत्रित किया जा रहा है, जबकि पांच से सात साल आयु सीमा वाले वाहन एक लीटर में सात से नौ किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं। पुराने वाहनों से हर माह 14 लाख रुपये का डीजल खपत होता है। सीटीओ निसार हुसैन रजा ने कहा कि पुराने वाहनों को हटाने पर काम चल रहा है। नए वाहनों की अपेक्षा इन वाहनों पर ज्यादा खर्च आ रहा है।
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नगर निगम में 50 के करीब वाहन 15 साल पूरे कर चुके हैं। अब इनको हटाने की तैयारी है। नए वाहनों के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, लेकिन अभी इन्हें खरीदने के लिए मंजूरी नहीं मिली है। वाहन न मिलने पर निजी वाहन मुहैया कर सफाई करवाई जाएगी। - निसार हुसैन रजा, सीटीओ, नगर निगम
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- 20 और वाहन कंडम, अगले साल ये भी हटाए जाएंगे
- 150 से ज्यादा वाहन निगम के पास मौजूदा समय में
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मंदिरों के शहर में सफाई व्यवस्था पर फिर संकट के बादल छाने लगे हैं। नगर निगम सफाई के लिए लगाए गए 15 साल पुराने वाहनों को बेड़े से बाहर करने की तैयारी में है। अक्तूबर तक कंडम हो चुके 50 वाहन हटा दिए जाएंगे। इसके अलावा 20 और वाहन अगले साल 15 वर्ष की मियाद पूरी कर रहे हैं, इन्हें भी निकाला जाएगा। सरकारी आदेश के अनुसार 15 साल पुराने वाहन को चलाया नहीं जा सकता। ऐसे में नगर निगम इनको बाहर करेगा। नए वाहन खरीदने के लिए अभी नगर निगम ने सरकार को प्रस्ताव ही भेजा है, जिसके लिए मंजूरी नहीं मिल पाई है।
मौजूदा समय में नगर निगम के पास 150 से ज्यादा वाहन हैं। इसमें 30 के करीब टिप्पर, 12 जेसीबी, छह पोकलेन मशीनों के अलावा वाटर टैंकर, वाटर स्प्रिंकलर और अन्य वाहन हैं। इनमें 50 ऐसे हैं जो 15 साल पूरे कर चुके हैं। इसमें पांच टिप्पर, दो जेसीबी और एक पोकलेन भी मशीन है।
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नगर निगम को अब तक नए वाहन नहीं मिल पाए : नवंबर से नगर निगम को किराये पर वाहन मुहैया करने पड़ेंगे। अधिकारियों के अनुसार सफाई के साथ अन्य काम सुचारू रूप से चलाने के लिए निजी वाहनों को किराये पर लेना ही अंतिम विकल्प होगा। क्योंकि नए वाहन खरीदने के लिए अभी तक सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। पहले ही शहर में वाहन कम होने के कारण सफाई सही तरीके से नहीं हो पा रही है। सुबह वार्डों से कचरा उठाने के बाद दूसरे दिन ही डंपिंग साइट साफ हो पा रही हैं। मौजूदा समय में 30 के करीब टिप्पर हैं, लेकिन 75 की जरूरत है। 12 जेसीबी की जगह 30 चाहिए। इससे वार्डों में डंपिंग साइट की सफाई दिन में दो समय हो सकेेगी। मौजूदा समय में कुछ ऐसी भी डंपिंग साइट हैं, जिनकी सफाई दो-दो दिन बाद हो रही है।
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400 एमटी कचरा हर रोज
लगाना पड़ रहा ठिकाने
वाहनों के माध्यम से शहर में 400 मीट्रिक टन कचरा हर रोज उठाना पड़ रहा है। डंपिंग साइट से कचरा कोट भलवाल तक पहुंचाया जाता है। वाहनों के अभाव में कचरा ठिकाने लगाने में परेशानी आ सकती है। 50 से ज्यादा वाहन काफी कंडम हो चुके हैं। कुछ में कचरा लोड करने के बाद सड़कों पर बिखरता जाता है। तिरपाल लगाकर इसे डंपिंग साइट तक पहुंचाना पड़ रहा है।
पुराने वाहनों से कचरा उठाने में आ रहा ज्यादा खर्च
नगर निगम को 400 मीट्रिक टन कचरा ठिकाने लगाने में 28 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा खपत पुराने वाहनों से हो रही है। एक लीटर डीजल में तीन से चार किलोमीटर सफर ही तय हो पा रहा है। हर रोज डंपिंग साइट से कोट भलवाल तक आने-जाने में तीस किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में औसतन दस लीटर डीजल की खपत हो रही है। नगर निगम के पास 70 के करीब पुराने वाहन हैं। अभी तक इन्हीं वाहनों के माध्यम से कचरा एकत्रित किया जा रहा है, जबकि पांच से सात साल आयु सीमा वाले वाहन एक लीटर में सात से नौ किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं। पुराने वाहनों से हर माह 14 लाख रुपये का डीजल खपत होता है। सीटीओ निसार हुसैन रजा ने कहा कि पुराने वाहनों को हटाने पर काम चल रहा है। नए वाहनों की अपेक्षा इन वाहनों पर ज्यादा खर्च आ रहा है।
नगर निगम में 50 के करीब वाहन 15 साल पूरे कर चुके हैं। अब इनको हटाने की तैयारी है। नए वाहनों के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, लेकिन अभी इन्हें खरीदने के लिए मंजूरी नहीं मिली है। वाहन न मिलने पर निजी वाहन मुहैया कर सफाई करवाई जाएगी। - निसार हुसैन रजा, सीटीओ, नगर निगम