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11 सितंबर को मनाया जाएगा नागपंचमी का पर्व
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जम्मू। प्रदेश भर में शनिवार 11 सितंबर को नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। जम्मू (डुग्गर प्रदेश) में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की ऋषि पंचमी के दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है।
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार नागपंचमी पर्व को लेकर कुछ मतभेद हैं। जैसे, राजस्थान एवं बंगाल में श्रावण मास के कृृष्ण पक्ष की पंचमी को यह पर्व मनाते हैं और उत्तर भारत में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। पंचमी तिथि के स्वामी नाग होने के कारण इस दिन नाग देवता की पूजा और व्रत कर सकते हैं। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भय तथा कालसर्प योग शमन होता है। नागपंचमी के दिन सर्पों की जाती है। कोरोना काल के चलते इस बार घर में ही नाग देवता की पूजा करें। इस दिन नाग देवता की बांबी में श्रीफल, दूध, मीठा रोट, फूल चढ़ाए चढ़ाएं। मान्यता है कि कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा श्लोक का उच्चारण कर सर्प का जहर उतारा जाता है और सर्प के प्रकोप से बचने के लिए नाग की पूजा की जाती है। पूजा के लिए घर की एक दीवार पर गेरू से लेप कर यह हिस्सा शुद्ध करें। इस छोटे से भाग पर कोयले या घी से बने काजल की तरह के लेप से एक चौकोर डिब्बा बनाएं। इस डिब्बे के अंदर छोटे सर्प (चित्र) बनाकर उनकी पूजा करें। कई परिवार घर के द्वार पर चंदन से सर्प की आकृति बनाकर पूजा करते हैं।
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महंत रोहित शास्त्री के अनुसार नागपंचमी पर्व को लेकर कुछ मतभेद हैं। जैसे, राजस्थान एवं बंगाल में श्रावण मास के कृृष्ण पक्ष की पंचमी को यह पर्व मनाते हैं और उत्तर भारत में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। पंचमी तिथि के स्वामी नाग होने के कारण इस दिन नाग देवता की पूजा और व्रत कर सकते हैं। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भय तथा कालसर्प योग शमन होता है। नागपंचमी के दिन सर्पों की जाती है। कोरोना काल के चलते इस बार घर में ही नाग देवता की पूजा करें। इस दिन नाग देवता की बांबी में श्रीफल, दूध, मीठा रोट, फूल चढ़ाए चढ़ाएं। मान्यता है कि कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा श्लोक का उच्चारण कर सर्प का जहर उतारा जाता है और सर्प के प्रकोप से बचने के लिए नाग की पूजा की जाती है। पूजा के लिए घर की एक दीवार पर गेरू से लेप कर यह हिस्सा शुद्ध करें। इस छोटे से भाग पर कोयले या घी से बने काजल की तरह के लेप से एक चौकोर डिब्बा बनाएं। इस डिब्बे के अंदर छोटे सर्प (चित्र) बनाकर उनकी पूजा करें। कई परिवार घर के द्वार पर चंदन से सर्प की आकृति बनाकर पूजा करते हैं।
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