{"_id":"58007e054f1c1b6e52291833","slug":"muslim-family-became-hosts-for-the-marriage-of-kashmiri-pandit-couple","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मिसाल: J&K में कश्मीरी पंडित जोड़े की शादी में मुस्लिम और सिख बने मेजबान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिसाल: J&K में कश्मीरी पंडित जोड़े की शादी में मुस्लिम और सिख बने मेजबान
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 14 Oct 2016 05:28 PM IST
विज्ञापन
कश्मीरी पंडित जोड़े की शादी
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घाटी में हिंसा का केंद्र बने दक्षिण कश्मीर में कश्मीरी पंडित जोड़े की शादी में मुस्लिम और सिख समुदाय की गर्मजोशी देखते ही बनी। पुलवामा जिले के लोसवानी गांव की नीशू पंडिता और तहाब गांव के आशू टिक्कू की शादी हुई। लेकिन, विस्थापित पंडितों के परिवार में शादी का उत्साह उनके मुस्लिम और सिख पड़ोसियों की उत्साहित मौजूदगी से दुगना हो गया।
खास बात है कि शादी के ज्यादातर इंतजाम मुस्लिम और सिख समुदाय के लोगों ने करवाए। टेंट लगाने से लेकर शादी के लिए ईंधन की लकड़ी, रिश्तेदारों की आवभगत का जिम्मा उन्होंने ही संभाला। लोक गीत वानवुन के दौरान मुस्लिम महिलाओं की संख्या शादी वाले घर के रिश्तेदारों से भी अधिक थी। वहीं पुरुष सदस्यों ने घर की सफाई से लेकर दूल्हा-दुल्हन के घर को सजाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
विज्ञापन
खास बात है कि शादी के ज्यादातर इंतजाम मुस्लिम और सिख समुदाय के लोगों ने करवाए। टेंट लगाने से लेकर शादी के लिए ईंधन की लकड़ी, रिश्तेदारों की आवभगत का जिम्मा उन्होंने ही संभाला। लोक गीत वानवुन के दौरान मुस्लिम महिलाओं की संख्या शादी वाले घर के रिश्तेदारों से भी अधिक थी। वहीं पुरुष सदस्यों ने घर की सफाई से लेकर दूल्हा-दुल्हन के घर को सजाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
विज्ञापन
पारंपरिक अंदाज में हुई बारात की मेहमाननवाजी
विवाह
- फोटो : FILE PHOTO
क़ुल मिलाकर माहौल ऐसा बंध गया कि रिश्तेदारों को लगा शादी मुस्लिम और सिख पड़ोसियों की मेजबानी में ही हो रही है। तमाम इंतजामों को बिना कहे देखते पड़ोसी हर मेहमान की आवभगत में जुटे रहे। बारात लेकर आए दूल्हे के साथ मुस्लिम दोस्त शामिल थे। सभी दुल्हन के घर पर 9 घंटे ठहरे।
वहीं, दुल्हन के परिवार का हाथ बंटाते हुए मुस्लिम और सिख पड़ोसियों ने पारंपरिक अंदाज में बारात की मेहमाननवाजी की। इंतजामों में सक्रिय रूप से शामिल मुस्लिम और सिख समुदाय के लोगों ने कहा ये घर की शादी है। यही कश्मीरियत है। उल्लेखनीय है कि आतंकी बुरहान की मौत के बाद 9 जुलाई से भड़की हिंसा से घाटी का सामाजिक जीवन और शादी समारोह बुरी तरह से प्रभावित हुए।
वहीं, दुल्हन के परिवार का हाथ बंटाते हुए मुस्लिम और सिख पड़ोसियों ने पारंपरिक अंदाज में बारात की मेहमाननवाजी की। इंतजामों में सक्रिय रूप से शामिल मुस्लिम और सिख समुदाय के लोगों ने कहा ये घर की शादी है। यही कश्मीरियत है। उल्लेखनीय है कि आतंकी बुरहान की मौत के बाद 9 जुलाई से भड़की हिंसा से घाटी का सामाजिक जीवन और शादी समारोह बुरी तरह से प्रभावित हुए।