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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा- 'घर के दरवाजे पर मिले न्याय तभी बदलेगी व्यवस्था'
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 09 Oct 2016 08:24 PM IST
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भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर
- फोटो : PTI
भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा है कि न्याय मिलने में देरी के कारण गरीब लोगों को हताश होना पड़ता है।
न्याय जल्द मिलना चाहिए। साथ ही सस्ता होना चाहिए। लोगों को उनके घर के दरवाजे पर न्याय मिले तभी व्यवस्था बदलेगी। ठाकुर अपने पैतृक गृह जिला रामबन के उखराल में मुंसिफ कोर्ट का नींव पत्थर रखने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।
चीफ जस्टिस ठाकुर ने कहा कि अक्सर लोगों को न्याय मिलने में देर होती है। वर्षों तक लोग न्याय पाने के लिए भटकते रहते हैं। अंत में एक गरीब इंसान न्याय की उम्मीद ही छोड़ देता है। पर न्याय हर व्यक्ति का हक है। कानून व्यवस्था के तहत हर किसी को न्याय मिलना चाहिए। यह लोगों को घर के दरवाजे तक मुहैया होना चाहिए तभी लोगों की न्याय व्यवस्था के प्रति निष्ठा बढ़ेगी।
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न्याय जल्द मिलना चाहिए। साथ ही सस्ता होना चाहिए। लोगों को उनके घर के दरवाजे पर न्याय मिले तभी व्यवस्था बदलेगी। ठाकुर अपने पैतृक गृह जिला रामबन के उखराल में मुंसिफ कोर्ट का नींव पत्थर रखने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।
चीफ जस्टिस ठाकुर ने कहा कि अक्सर लोगों को न्याय मिलने में देर होती है। वर्षों तक लोग न्याय पाने के लिए भटकते रहते हैं। अंत में एक गरीब इंसान न्याय की उम्मीद ही छोड़ देता है। पर न्याय हर व्यक्ति का हक है। कानून व्यवस्था के तहत हर किसी को न्याय मिलना चाहिए। यह लोगों को घर के दरवाजे तक मुहैया होना चाहिए तभी लोगों की न्याय व्यवस्था के प्रति निष्ठा बढ़ेगी।
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पिता को याद कर भावुक हुए जस्टिस
कार्यक्रम में मौजूद भारत के मुख्य न्यायधीश
- फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि उनके बचपन के दिनों में क्षेत्र में कोई कोर्ट न होने के कारण लोगों को दूर-दूर जाकर न्याय की गुहार लगानी पड़ती थी। इसमें उनके पैसे व वक्त दोनों ही बर्बाद होते थे। इसी सोच को लेकर उखराल में मुंसिफ कोर्ट का नींव पत्थर रखा गया है।
उखराल में लोगों को संबोधित करते हुए जस्टिस ने अपने बचपन को याद किया। पिता को याद करते समय जस्टिस ठाकुर भावुक हो गए। पिता को याद करके उनकी आंखें नम हो गईं। आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि पिता के अथक प्रयासों के कारण आज वह यहां पहुंचे हैं। इस अवसर पर उन्होंने रामबन में स्थानीय छात्रों के लिए एक लाइब्रेरी बनाने की भी बात कही।
उखराल में लोगों को संबोधित करते हुए जस्टिस ने अपने बचपन को याद किया। पिता को याद करते समय जस्टिस ठाकुर भावुक हो गए। पिता को याद करके उनकी आंखें नम हो गईं। आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि पिता के अथक प्रयासों के कारण आज वह यहां पहुंचे हैं। इस अवसर पर उन्होंने रामबन में स्थानीय छात्रों के लिए एक लाइब्रेरी बनाने की भी बात कही।