ब्रांड मोदी से धरती की जन्नत को देंगे दावोस का दर्जा
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जम्मू कश्मीर के कायाकल्प के लिए मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शरण में हैं। मोदी के वैश्विक आभा मंडल पर मुफ्ती का भरोसा बढ़ गया है। उन्हें लगता है कि मोदी की करिश्माई शख्सियत जम्मू कश्मीर में निवेश के लिए विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर सकती है।
लिहाजा, ब्रांड मोदी के बूते जम्मू कश्मीर के पर्यटन विकास और रियासत को आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। मोदी की विदेश यात्रा से वापसी के बाद मुफ्ती उनसे दिल्ली में मुलाकात कर इस बाबत कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा करने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय ट्रेवल मार्ट का मुफ्ती का ड्रीम प्रोजेक्ट अब ब्रांड मोदी के भरोसे ही आगे बढ़ने वाला है।
मुफ्ती गुलमर्ग को स्विटजरलैंड के दावोस की तरह विकसित करना चाहते हैं। इस बाबत गुलमर्ग में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय कारपोरेट कानक्लेव के लिए मुफ्ती ने मोदी को न्योता भेजा है।
सर्वश्रेष्ठ टूरिस्ट डेस्टिनेशन को पहला कदम
स्विटजरलैंड के दावोस की तर्ज पर होने वाले इस आयोजन में मोदी मुख्य अतिथि की भूमिका निभा सकते हैं। यह कानक्लेव दिसंबर में गुलमर्ग में आयोजित किया जाएगा। वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने इसके लिए विदेशी कंपनियों से संपर्क शुरू किया है। मुफ्ती ने श्रीनगर में ट्रेवल मार्ट के आयोजन की शुरुआत की है।
इसमें 20 देशों के प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं। वह इस सिलसिले को अंतर्राष्ट्रीय कानक्लेव तक ले जाना चाहते हैं। इसे कश्मीर को विश्व का सर्वश्रेष्ठ टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में पहल की संज्ञा दी जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय कानक्लेव में मोदी दूसरे देशों के टाप कारपोरेट्स मुखिया की आगवानी कर सकते हैं।
यह स्विटजरलैंड के दावोस में प्रतिवर्ष होने वाले वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की तर्ज पर आयोजित होगा।
मोदी के गुजरात तक पहुंच गए मुफ्ती
गौरतलब है कि शुरुआती दिनों में विवादास्पद निर्णयों के कारण मुफ्ती चौतरफा आलोचनाओं के शिकार हुए थे। शांतिपूर्ण एवं भारी मतदान के लिए पाकिस्तान, अलगाववादियों और आतंकियों को श्रेय देने से उनकी छवि को तो धक्का पहुंचा ही, साथ ही मोदी सरकार की भी किरकिरी हुई। बाद में अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई ने मोदी और मुफ्ती की दूरी बढ़ा दी थी।
अब मुफ्ती उस दूरी को पाटने में सफल होते दिख रहे हैं। मुफ्ती ने विकास के एजेंडे पर पहल भी की है। मुंबई में फिल्मी सितारों और टूर आपरेटरों से मुलाकात के साथ शुरू हुई मुहिम गुजरात तक पहुंची। मुफ्ती ने गुजरात के पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश की। मुफ्ती फिर दिल्ली भी गए। गुजरात में मुफ्ती की कवायद को मोदी को रिझाने की कोशिशों से भी जोड़कर देखा गया।