मेरे शपथ ग्रहण समारोह में आएंगे मोदी: सईद
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद की मुलाकात में कश्मीर के विकास का नया एजेंडा तय हुआ। इंदिरा गांधी और शेख अब्दुल्ला के बीच हुए समझौते की तर्ज पर मोदी-मुफ्ती के कामन एजेंडे को ऐतिहासिक स्वरूप दिया गया है। मुलाकात के बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा, पीएम मोदी मेरे शपथ ग्रहण समारोह में जरूर आएंगे।
दो विपरीत ध्रुवों के बीच हुआ यह करार देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने की प्रतिबद्धता के साथ अमन और विकास के मूलमंत्र पर आधारित है। भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार का न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) सिर्फ सरकार चलाने की सहूलियत के लिए बना दस्तावेज नहीं बल्कि इसे कश्मीर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में मील का पत्थर बनाने की कवायद हो रही है।
मुलाकात के लिए मुफ्ती दिल्ली पहुंचे और पीएम मोदी से मुलाकात की। मोदी और मुफ्ती मुलाकात में कश्मीर के भविष्य की नई दिशा तय करने की कोशिश की गई। कश्मीरियों का दिल जीतने के लिए केंद्र सरकार सौगातों का पिटारा खोल सकती है।
जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत की नीति होगी लागू
मोदी और मुफ्ती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नीति पर ही आगे बढ़ने का ऐलान करने वाले हैं। मोदी ने पहले ही जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत की नीति लागू करने की बात कही है और मुफ्ती की नजर में वाजपेयी का फार्मूला कश्मीर समस्या का ही एकमात्र समाधान रहा है।
दो महीने से भाजपा और पीडीपी के बीच चल रही बातचीत में न्यूनतम साझा कार्यक्रम के एक-एक बिंदु को कुशलता से गढ़ा गया है, ताकि दोनों दलों का वोट बैंक संतुष्ट हो सके। पीडीपी ने शर्तों पर अड़ियल रुख अपनाकर कश्मीरियों को यह बताने की कोशिश कि वह भाजपा के सामने घुटने नहीं टेक रही है।
इसी तरह भाजपा ने भी जम्मू की उपेक्षा को समाप्त करने और पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को नागरिकता जैसे मुद्दे पर प्रतिबद्धता से अपने वोट बैंक को सहेजने की कोशिश की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा की मुलाकात से पहले न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति बन चुकी थी।
केंद्र खोल सकता है सौगातों का पिटारा
प्रधानमंत्री मोदी कश्मीर के प्रति संवेदनशील रहे हैं। पीएम पद की शपथ लेने के बाद से वह एक दर्जन से अधिक बार कश्मीर आए। मोदी ने दिवाली भी कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों के बीच मनाई।
अब जम्मू कश्मीर की सरकार में भाजपा की पहली बार शिरकत के मौके पर मोदी कश्मीरियों के दिल जीतने के लिए सौगातों का पिटारा खोल सकते हैं। इसके संकेत मिलने लगे हैं।
बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज की मांग केंद्र के पास लंबित है। सरकार के गठन के तुरंत बाद केंद्र इस दिशा में कदम उठा सकता है। कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास पहले से ही एनडीए सरकार के एजेंडे में है।