जानिए, सरकार से क्यों नाराज हैं सांसद मुज्जफर हुसैन बेग
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रियासत में गठबंधन सरकार की हिस्सेदार पीडीपी के वरिष्ठ नेता एवं बारामुला से सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग गठबंधन सरकार के कामकाज से असंतुष्ट हैं।
उनका कहना है कि राज्य में खासकर कश्मीर में जो वर्तमान माहौल है वह यहां के लोगों के लिए असुरक्षित है। अगर यह गठबंधन केवल कुर्सी के लिए हुआ है तो फिर ठीक है, चलाइये इसे जब तक चले।
मगर राज्य की खुशहाली के लिए मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आपसी बातचीत कर सुरक्षित माहौल बनाने की जरूरत है।
मंगलवार को अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में पीडीपी के संस्थापक सदस्य बेग ने कहा कि पूरे देश में जो माहौल बन रहा है, उसका सीधा असर जम्मू-कश्मीर पर पड़ रहा है।
यही नहीं, जो कुछ जम्मू-कश्मीर में हो रहा है उसका भी असर भारत पर पड़ रहा है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि यह बात प्रधानमंत्री के ध्यान में लाई जाए।
इन्हीं हालातों से अवगत करवाने के लिए उन्होंने एक खुला खत प्रधानमंत्री को उनके कश्मीर दौरे से पहले लिखा था। उन्होंने कहा कि इस बिगड़ते माहौल का असर देश में अल्पसंख्यकों पर पड़ रहा है।
खासकर अगर कश्मीर की बात करें तो कश्मीर में मुसलमान अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। समाज में कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या पीडीपी-भाजपा का गठबंधन माहौल बिगाड़ने के लिए ही हुआ था।
इनके हाथ मिलाने से क्या दूरियां और बढ़ गई हैं, क्या नफरत की दीवारें और मजबूत होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कश्मीर दौरे पर बेग ने कहा कि कश्मीर के मंच से पूरे देश को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से भाईचारे का पैगाम जाना चाहिए था।
यह भी ऐलान किया जाना चाहिए था कि जो गलत बयानबाजी और सामुदायिक बंटवारा चाहते हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री संदेश देते तो अच्छा रहता
उन्होंने कहा कि मुफ्ती साहब ने दौरे से पहले यह दावे किए थे कि प्रधानमंत्री का दौरा ऐतिहासिक होगा। लोगों को उम्मीद थी कि यहां से किसी सियासी पैकेज का ऐलान भी होगा।
लेकिन इस मौके को गंवाया गया। अगर पड़ोसी मुल्कों के साथ बातचीत का ऐलान इस मंच से किया जाता तो एक अच्छा संदेश जाता। इससे लगता है कि मोदी और मुफ्ती के बीच सियासी बात हुई ही नहीं, अगर हुई है तो सहमति नहीं बन पाई।
बेग ने प्रधानमंत्री के बयान कि ‘मुझे किसी के सुझाव की जरूरत नहीं’ पर कहा कि भारत का कोई भी प्रधानमंत्री हो उसके लिए जम्मू-कश्मीर सबसे बड़ा मामला है, जिसके लिए अगर कोई सुझाव दे उससे सुनना चाहिए।
मौजूदा गठबंधन पर बेग ने कहा कि इस गठबंधन को बनाने की तजवीज मेरी ही थी, लेकिन उसके लिए कुछ शर्तें थीं। इसमें एक मुख्य शर्त थी कि पीडीपी और भाजपा की अलग सोच को मिलाना, कुछ मुद्दों पर सहमति जताना।
लेकिन जब सरकार बनी मुझे पूछा नहीं गया। यह मेरे लिए इस समय अच्छा सिद्ध हो रहा है, नहीं तो इस समय मैं भी कटघरे में खड़ा होता।
उन्होंने कहा कि अगर पीडीपी और भाजपा नेकनीयत से हाथ मिलाएं तो हिंदुस्तान में हिंदू और मुसलमान करीब आते। मगर बदकिस्मती से ऐसा होता नहीं दिख रहा।
अगर मोदी को विदेशों के दौरों से फुर्सत मिले और मुफ्ती को जम्मू में ठिकाना मिले तो उन्हें बात करनी चाहिए और मौजूदा हालातों को सुधारने और लोगों का भला चाहने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
सरकार के बनने के बाद से हिंदू और मुसलमान के बीच, सरकार और लोगों के बीच दूरियां बढ़ी हैं। महबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलों पर बेग का कहना है कि वह मेरी छोटी बहन हैं।
मगर वह मुफ्ती की बेटी है, इसलिए वह मुख्यमंत्री बनें यह जरूरी नहीं और वह उनकी बेटी हैं इसलिए भी वह मुख्यमंत्री न बनें यह भी जरूरी नहीं। अगर लोगों की राय में वह ही राज्य की सही मुख्यमंत्री हैं तो उन्हें बनाएं। अगर मुफ्ती चाहें और भाजपा भी सहमति जताए तो बनाएं।