रूठा मानसून, जम्मू में बन रहे सूखे के हालात
अच्छे दिनों का आना मुश्किल होता जा रहा है। मानसून की देरी के चलते जम्मू संभाग में अभी भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। पिछले दो दिनों के अंदर जम्मू सहित कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हुई है।
अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो सूखे जैसे हालात बने रहने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी बारिश कम होगी। 19 जुलाई के बाद मानसून में तेजी आने की उम्मीद है लेकिन तक भी सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून जम्मू में दस्तक दे चुका है। इसका अधिक असर 17-18 जुलाई तक रहने की उम्मीद है। इसी क्रम में जम्मू संभाग के विभिन्न हिस्सों में मानसून में होने वाली सामान्य बारिश की तुलना में कम बारिश दर्ज की जा रही है।
18-19 जुलाई को कमजोर होगा मानसून
कठुआ में 213.4 एमएम सामान्य बारिश की तुलना में 175.8 एमएम वर्षा हुई जो 18 प्रतिशत कम हुई, जबकि रियासी में 334.6 एमएम वर्षा दर्ज हुई जो सामान्य 296 एमएम बारिश की तुलना में 13 फीसदी अधिक मानी जा रही है।
कटड़ा में सबसे अधिक बारिश्ा
बुधवार की सुबह तक 50.5 एमएम जम्मू में बारिश दर्ज हुई, जबकि मंगलवार को 1.4 एमएम बारिश हुई। उधमपुर में 27.8 एमएम और मंगलवार को 10.8 एमएम वर्षा हुई। भद्रवाह में 7.8 एमएम और मंगलवार को बारिश नहीं हुई।
बटोत में बुधवार तक 12 एमएम बारिश हुई। बनिहाल में बुधवार को 7.0 एमएम और मंगलवार को बारिश नहीं हुई। कठुआ में 52.4 एमएम बुधवार को, जबकि मंगलवार को 10.6 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं कटड़ा में सबसे अधिक 106.4 एमएम बुधवार को वर्षा हुई, जबकि मंगलवार को 79.9 एमएम बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग श्रीनगर के मुताबिक जम्मू संभाग में पिछले दो दिनों से मानसून सीजन की मजबूती बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी में मानसून के दबाव बढ़ने से जम्मू संभाग में इसका मजबूत असर बना है और इसका असर दो दिनों तक रहने का अनुमान है।
सुस्त मानसून, गहराएगा बिजली-पानी संकट
कमजोर मानसून रहने की स्थिति में बिजली और पानी संकट और गहराएगा। अभी तक सामान्य से कम बारिश होने की वजह से उमस और गर्मी के बने रहने वजह से बिजली की मांग ज्यादा होने से ओवरलोड में कमी नहीं आने पर आठ से पंद्रह घंटे की अघोषित कटौती से राहत नहीं मिल पाई है।
ढांचागत खराबी या ट्रांसफार्मर जलने पर तो लोगों को कई कई दिनों तक बिजली गुल रहने से बेहाल होना पड़ रहा है। बिजली विभाग के अधिकारी मजबूत मानसून के लिए आसमान की तरफ नजरें लगाए हुए हैं, ताकि बारिश की वजह से सुहावने मौसम से बिजली की मांग में कमी आए और ओवरलोड कम होने से अघोषित कटौती से राहत मिल सकें।
जम्मू-कश्मीर में बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले साल बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर करीब 1000 मेगावाट से ज्यादा था, जो अब बढ़कर 1200 मेगावाट के पार पहुंच चुका है।
ओवरलोड के चलते जल रहे ट्रांसफार्मर
जिले में ही करीब 8500 बिजली के ट्रांसफार्मरों के माध्यम से उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जा रही है। इनमें से ओवरलोड व अन्य समस्याओं के चलते सैकड़ों ट्रांसफार्मर जले हुए हैं।
ट्रांसफार्मर जलने वाले इलाकों में हायतौबा की स्थिति है। हालत तो यह हो गई है कि ट्रांसफार्मर बैंकों में स्टैंड बाय ट्रांसफार्मर तक नहीं बचे हैं। नानक नगर में बिजली पानी के लिए प्रदर्शन नानक नगर के खालसा चौक पर बुधवार सुबह स्थानीय लोगों ने बिजली की भारी अघोषित कटौती के विरोध में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस बार बिजली कटौती सारे रिकार्ड तोड़ रही है। इससे तो जीना मुहाल हो गया है। सड़क पर उतरने के अलावा ओर कोई विकल्प नहीं रहा है। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
बाढ़ नियंत्रण विभाग अलर्ट
जम्मू संभाग की सभी बड़ी नदियों पर बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। पहली जुलाई से लेकर सितंबर पूरे माह तक ये नियंत्रण कक्ष संचालित रहेंगे।
नियंत्रण कक्ष में कार्यरत बाढ़ नियंत्रण विभाग के कर्मचारी चौबीस घंटे ड्यूटी पर तैनात रहकर संबंधित आला अधिकारियों तक जारी मानसून सीजन के दौरान नदियों में पानी के बहाव पर पूरी नजर रखते हुए रिपोर्ट देते रहेंगे, जबकि ग्रामीण और शहरी इलाकों के लोगों को मानसून सीजन में दरिया में एकाएक पानी का बहाव तेज हो जाता है, जिससे खतरनाक स्थिति बन जाती है, ऐसे में सबसे अपील भी की जा रही है कि नदियों में न जाएं।
तवी नदी जम्मू में बिक्रम चौक के निकट शिव मंदिर के साथ लगते बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, अखनूर में दाहिने तट पर, ज्यौड़ियां में नियंत्रण कक्ष स्थापित हो चुका है। कठुआ के राजबाग के उज्ज दरिया के किनारे जखोल में कक्ष स्थापित किया। उधमपुर के सलमेय में कक्ष स्थापित हुआ है, जहां से जम्मू में तवी में बहाव की स्थिति के बारे में सूचना दी जाती है।
उधमपुर से तवी का बरसाती पानी जम्मू तवी तक पहुंचने में छह घंटे लगते हैं, जिससे छह घंटे पहले सूचना का प्रावधान है। बाढ़ नियंत्रण विभाग जम्मू के चीफ इंजीनियर एचसी जेरथ ने बताया कि निक्की तवी, चिनाब और उज्ज दरिया में बरसात की वजह से बाढ़ खतरनाक बन जाती है। इसके कारण मानसून सीजन में तवी, चिनाब और उज्ज दरिया के किनारे नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं तथा संबंधित इंजीनियरों और कर्मियों को कार्यभार सौंपा गया है।