यूपीए की राह पर मोदी का मिशन कश्मीर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मिशन कश्मीर यूपीए का राह पर ही आगे बढ़ेगा। पीडीपी के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार हुए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) में वही सारे मुद्दे शामिल किए गए हैं जो यूपीए की कश्मीर नीति में शुमार थे।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने भी आंशिक रूप से अफस्पा की वापसी पर सहमति जताई थी। तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इसके लिए होम वर्क भी पूरा कर लिया था। बाद में आतंकी घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी।
अब भाजपा-पीडीपी गठबंधन में यही मुद्दा समझौते का आधार बन रहा है। अनुच्छेद 370 को हटाने का मामला संघ और भाजपा का एजेंडा रहा है जिसे सरकार बनाने के लिए फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अफस्पा पर पीडीपी और अनुच्छेद 370 पर भाजपा के झुकने के बाद अब सीएमपी पर सहमति बन गई है।
सीएमपी में यूपीए की नीतियों पर ही मुहर
नई सरकार एक सप्ताह के अंदर अस्तित्व में आ सकती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कश्मीर में सेना की संख्या घटाने की कवायद भी शुरू हुई थी। इसके तहत श्रीनगर से सेना के 54 बंकर हटाए गए थे।
सेना ने 179 स्कूल भवन, 37 अस्पताल भवन, 33 होटल, 919 निजी भवन, 264 सरकारी भवन और 26 औद्योगिक इकाइयों को खाली किया। उमर अब्दुल्ला की सरकार में गृह राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू ने विधानसभा को बताया था कि 1858 सरकारी और निजी भवनों पर सेना का अवैध कब्जा रह गया है।
इसी तरह 66 हजार 690 कनाल भूमि पर भी सेना का कब्जा बताया गया था। पीडीपी ने भवनों और जमीन को सेना से खाली करवाने की शर्त भी भाजपा के सामने रखी थी। सीएमपी में इस मुद्दे को शामिल कर यूपीए की नीतियों पर ही मुहर लगाई जा रही है।
शांत इलाकों से अफस्पा हटाई जाएगी
सीएमपी में नई बात सिर्फ इतनी है कि अफस्पा को हटाने के लिए एक कमेटी बनेगी जिसकी अनुशंसा पर तुलनात्मक दृष्टि से शांत इलाकों से अफस्पा हटाई जाएगी। हालांकि, सेना इस पर सहमत नहीं है। पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को नागरिकता का वादा भाजपा वर्षों से करती रही है।
लगभग 25 हजार परिवार इस श्रेणी में हैं जो लोकसभा के लिए तो वोट डालते हैं, लेकिन, विधानसभा के लिए वोट नहीं डाल पाते। पीडीपी की मान्यता रही है कि वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी स्टेट सब्जेक्ट नहीं हैं इसलिए जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे के तहत ऐसे लोगों को नागरिकता नहीं दी जा सकती।
अब भाजपा और पीडीपी के सीएमपी में इस मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाने की बात कही जा रही है। अगर इसके लिए कोई ठोस नीति बन पाती है तो इसे यूपीए की राह से अलग भाजपा की उपलब्धि कहा जा सकता है। लेकिन, सीएमपी में इसका जिक्र सांकेतिक रूप में ही किया जा रहा है।