मोदी सरकार ने अलगाववादियों को विदेशी फंडिंग रोकने को कसा शिकंजा
कश्मीर में तेज से समान्य हो रहे हालात के बाद केंद्र ने अलगाववादियों के खिलाफ शिकंजा कसने की कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया है। आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद हिंसा फैलाने और अफवाहें फैलाकर अशांति की स्थिति पैदा करने में अलगाववादियों की भूमिका रही है।
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने अलगाववादियों की ताजा गतिविधियों पर केंद्र को रिपोर्ट भेजी है। अलगाववादी अब भी हड़ताल और बंद के आयोजनों को वापस लेने के मूड में नहीं हैं और अफवाहों का फिर से हवा दी जाने लगी है।
एनआईए ने आतंकवाद वित्त पोषण और जाली मुद्रा के लिए विशेष सेल का गठन कर अलगाववादियों को फंडिंग की जांच तेज कर दी है। उन्हें आर्थिक मोर्चे पर कमजोर करने के लिए विदेशी फंड की जांच को तेज किया गया है।
अलगाववदियों की विदेशी फंडिग पर शिकंजा
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों को मुताबिक रियासत सरकार पर भी केंद्र ने दबाव बनाया है। रियासत सरकार ने केंद्र की सलाह पर अलगाववादियों की फंडिंग पर नजर रखने के लिए निगरानी तंत्र विकसित किया है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक अलगाववादियों को हवाला के जरिए विदेशी फंड मिल रहा है।
सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय में वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स (फाइनेनशियल एक्शन टास्क फोर्स) इन अलगाववादियों को विदेशी फंड पर नजर रख रहा है। यह टास्क फोर्स इटरनेशनल एजेंसी सीएफटी से समन्वय कर कार्रवाई करेगी।
गृह मंत्रालय ने बनाया विशेष सेल
गृह मंत्रालय द्वारा आतंकवाद के लिए हो रही फंडिंग से निपटने के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय इंटेलीजेंस यूनिट, रेगुलटरी और इंफोर्समेंट एजेंसियों को भी इस मुद्दे पर जानकारियां जुटाने को कहा गया है।
नोटबंदी के बाद अलगाववादियों और उपद्रवियों का अर्थ तंत्र चरमरा गया है। नकली नोटों के धंधे पर भी लगाम लगी है। नतीजतन पत्थरबाजी और उपद्रव की घटनाओं पर अंकुश लग सका है।