चुनाव के चक्कर में प्रभावित नहीं होंगे राहत कार्य
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चुनाव आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आदर्श आचार संहिता जम्मू और कश्मीर में बाढ़ प्रभावितों के लिए चल रहे राहत और पुनर्वास के कार्यों में रोड़ा नहीं बनेगी। राज्य में 25 नवंबर से पांच चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि सरकारें सभी राहत और प्रशासनिक काम करती रह सकतीं हैं।
आयोग ने पीठ को इस संदर्भ में कैबिनेट सचिव, राज्य सरकार के मुख्य सचिव और जम्मू कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी के बीच हुए विभिन्न पत्राचार से भी अवगत कराया। आयोग ने कहा कि पांच नवंबर को यह साफ किया जा चुका है कि राहत और पुनर्वास के कार्य बिना किसी रुकावट को जारी रख सकते हैं।
आदर्श चुनाव संहिता में छूट
पीठ ने जम्मू और कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी प्रमुख भीम सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में उठाए गए अन्य मसलों पर शुक्रवार को विचार करने से इनकार करते हुए इन पर 14 नवंबर को सुनवाई करने की बात कही। पीठ ने केंद्र सरकार से राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए 44 हजार करोड़ रुपये की राज्य सरकार की मांग पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
बाढ़ प्रभावितों को घटिया खाद्य सामग्री वितरित किए जाने की ओर ध्यान दिए जाने पर पीठ ने कहा कि हम प्रदेश सरकार से सुशासन की उम्मीद करते हैं। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बाढ़ के चलते सरकार के राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी बाधा को हटाने के लिए आदर्श चुनाव संहिता में छूट की बात कही थी।
कोर्ट ने इस संदर्भ में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया मांगी थी और सवाल किया था कि आखिर राजनीतिक दलों ने चुनाव स्थगित करने के लिए आयोग से संपर्क क्यों नहीं किया था।
एजेंसी