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पांच साल पहले घर से लापता व्यक्ति को घरवालों से मिलाया
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रियासी। जिला मुख्यालय में इंसानियत की एक और मिसाल देखने को मिली है। स्थानीय लोगों ने पांच साल पहले प्रयागराज से रियासी पहुंचेे मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को उसके घरवालों से मिला दिया। बुधवार को पीड़ित का बेटा अपने पिता को लेने पहुंचा। रियासी पुलिस थाने में जरूरी औपचारिकता पूरी करने के बाद उन्हें घर भेजा गया।
मुंबई में रह रहे नगर के वार्ड-5 के यश उपाध्याय बीते दिनों अपने रियासी स्थित घर पर आए थे। इस दौरान उनको मानसिक बीमारी से जूझ रहा उक्त व्यक्ति बाजार में घूमता दिखा। घर के बारे में पूछने पर वह कोई उचित जवाब नहीं दे पाया। यश ने उसका फोटो व वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट में साझा किया, जिसे आगे प्रयागराज में रहने वाले उनके दोस्त मनोज श्रीवास्तव ने भी आगे शेयर किया और प्रयागराज के मिजा मार्ग में रहने वाले रजत चौरसिया ने पहले मनोज व बाद में यश से संपर्क किया और कहा कि उक्त फोटो व वीडियो उनके पिता राकेश चौरसिया का है। रजत ने बताया कि पांच साल पहले दादा की मौत के बाद पिता की मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी और वह कहीं चले गए। काफी तलाश करने के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल पाया। पुलिस थाने में भी रिपोर्ट दर्ज करवाई।
उधर, राकेश चौरसिया के परिजनों का पता चलते ही स्थानीय लोगों ने उसको वापस घर भेजने की तैयारी शुरू कर दी। सामाजिक संस्थाओं ने पीड़ित के बेटे के पहुंचने पर उसका स्वागत किया और खाना खिलाकर दोनों को हार पहना उन्हें बस अड्डे तक लाया गया। पुलिस थाने में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि राकेश पूरा दिन बस अड्डे पर बने शापिंग कांपलेक्स में ही रहता था और रात को वहीं सोता था। स्थानीय दुकानदार व होटल वाले उसे खाना खिलाते थे।
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मुंबई में रह रहे नगर के वार्ड-5 के यश उपाध्याय बीते दिनों अपने रियासी स्थित घर पर आए थे। इस दौरान उनको मानसिक बीमारी से जूझ रहा उक्त व्यक्ति बाजार में घूमता दिखा। घर के बारे में पूछने पर वह कोई उचित जवाब नहीं दे पाया। यश ने उसका फोटो व वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट में साझा किया, जिसे आगे प्रयागराज में रहने वाले उनके दोस्त मनोज श्रीवास्तव ने भी आगे शेयर किया और प्रयागराज के मिजा मार्ग में रहने वाले रजत चौरसिया ने पहले मनोज व बाद में यश से संपर्क किया और कहा कि उक्त फोटो व वीडियो उनके पिता राकेश चौरसिया का है। रजत ने बताया कि पांच साल पहले दादा की मौत के बाद पिता की मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी और वह कहीं चले गए। काफी तलाश करने के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल पाया। पुलिस थाने में भी रिपोर्ट दर्ज करवाई।
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उधर, राकेश चौरसिया के परिजनों का पता चलते ही स्थानीय लोगों ने उसको वापस घर भेजने की तैयारी शुरू कर दी। सामाजिक संस्थाओं ने पीड़ित के बेटे के पहुंचने पर उसका स्वागत किया और खाना खिलाकर दोनों को हार पहना उन्हें बस अड्डे तक लाया गया। पुलिस थाने में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि राकेश पूरा दिन बस अड्डे पर बने शापिंग कांपलेक्स में ही रहता था और रात को वहीं सोता था। स्थानीय दुकानदार व होटल वाले उसे खाना खिलाते थे।
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