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जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों के खौफ से नहीं बन रहा अल्पसंख्यक आयोग

Tue, 28 Mar 2017 11:56 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 28 Mar 2017 11:56 AM IST
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MINORITY COMMISSION IN KASHMIR NOT FORMING DUE TO SEPRATISTS
जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती - फोटो : file photo

जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों के खौफ के कारण अल्पसंख्यक आयोग नहीं बन पा रहा है। अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जे के कारण रियासत में केंद्रीय कानून सीधे तौर पर लागू नहीं होता और रियासत सरकार ने हिंदुओं को अल्पसंख्यक श्रेणी में रखने के लिए अलग कानून बनाने में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई।  

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नतीजतन जम्मू कश्मीर में बहुसंख्यक मुस्लिमों को अल्पसंख्यक की सुविधाएं मिल रही हैं और इसके वाजिब हकदार इस सुविधा से वंचित हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय भी जम्मू-कश्मीर के बहुसंख्यक मुस्लिमों को अल्पसंख्यक मानते हुए छात्रवृत्ति की सुविधाएं दे रहा है। अलगाववादियों ने मुस्लिमों के बजाय हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने का विरोध किया है।
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रियासत सरकार को लगता है कि नया अल्पसंख्यक आयोग बनाने से बंद और हड़ताल का नया दौर शुरू हो सकता है। यही खौफ अल्पसंख्यक आयोग की राह में सबसे बड़ी बाधा है। जम्मू कश्मीर के समाज कल्याण मंत्री सज्जाद लोन कहते हैं कि रियासत में अल्पसंख्यक आयोग बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

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कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक हैं हिंदू

MINORITY COMMISSION IN KASHMIR NOT FORMING DUE TO SEPRATISTS
कश्मीर में अल्पसंख्यक हैं हिंदू - फोटो : File Photo

जम्मू में हिंदू बहुसंख्यक हैं और कश्मीर में मुस्लिमों की आबादी अधिक है। अल्पसंख्यक का निर्धारण ब्लाक स्तर पर नहीं किया जा सकता। इस तरह की मांग से कश्मीर के हालात बिगड़ सकते हैं। कश्मीर के मुस्लिमों ने हिंसा और आतंक के कारण कई समस्याएं झेली हैं। इसलिए उन्हें विशेष सहूलियत दी जानी चाहिए। 

भाजपा के एमएलसी विबोध गुप्ता इस मसले को विधान परिषद में उठा चुके हैं, लेकिन सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग बनाने की मांग खारिज कर दी। भाजपा का मानना है अल्पसंख्यक हिंदुओं को केंद्र और राज्य की योजनाओं के तहत सुविधाएं नहीं देना, उनके मानवाधिकार का उल्लंघन है।

कश्मीर में मुस्लिम आबादी 96 प्रतिशत से अधिक है और पूरी रियासत में यह प्रतिशत 68 फीसदी से ज्यादा है। लिहाजा हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं देने पर हिंदू संगठनों में रोष है। 

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