बांदीपोरा मामला: मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं, सोशल मीडिया पर वायरल हुई रिपोर्ट
उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के सुंबल में तीन साल की बच्ची के साथ हुए कथित दुष्कर्म की घटना के बारे में तैयार मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म के सबूत नहीं मिले हैं। पुलिस ने जो चार्जशीट अदालत में दाखिल की है उसमें अपराध की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। साथ ही यह रिपोर्ट मंगलवार को सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई। इस रिपोर्ट पर कंसल्टेंट आन ड्यूटी, इंचार्ज एचओडी गायनी एंड ओबीएस और मेडिकल सुप्रिटेंडेंट (स्किम्स एमसीएच, बेमिना) के हस्ताक्षर हैं। एसकेआईएमएस अस्पताल, बेमिना की चिकित्सा अधीक्षक शिफा देवा ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही रिपोर्ट प्रामाणिक है।
बता दें कि, 8 मई 2019 को सुंबल के एक गांव में एक परिवार ने अपने एक पड़ोसी लड़के पर उनकी 3 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया था, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धारा 3 और 5 के साथ-साथ आरपीसी की धारा 376 एबी 363 और 342 के अंतर्गत एफआईआर 81/ 2019 दर्ज कर लड़के को गिरफ्तार कर लिया।घटना की जांच के लिए विशेष टीम (एसआईटी) गठित की गई। घाटी में जगह-जगह प्रदर्शन हुए इस बीच पट्टन इलाके में प्रदर्शन के दौरान गंभीर रूप से घायल एक युवक की मौत भी हो गई।
आरोपी के पिता ने कहा था, बेटे को फंसाया गया
पीड़ित के पिता ने आरोप लगाया था कि उसकी छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म। जबकि आरोपी ताहिर के पिता ने आरोप लगाया कि उसकी संपत्ति पर कब्जा करने के लिए पड़ोसी ने फंसाया है। इस बीच 22 मई को हाई कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण ने पीड़िता को अंतरिम राहत के रूप में 1 लाख रुपये सौंपे थे। कुछ दिन पहले पुलिस ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज बांदीपोरा की विशेष अदालत के समक्ष 87 पेज की चार्जशीट, अन्य सबूत, जेवीसी की मेडिकल रिपोर्ट, सीएचसी सुंबल और अंतिम एफएसएल रिपोर्ट दाखिल की थी।
ये लिखा है मेडिकल रिपोर्ट में
जेवीसी बेमिना की मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टरों ने लिखा है कि बच्ची के निजी अंगों के आसपास किसी तरह की चोट का कोई सबूत नहीं था, जिसकी वजह से रक्तस्राव का वास्तविक स्रोत निर्धारित नहीं किया जा सका। इतना ही नहीं रिपोर्ट में लिखा है बच्ची की विस्तृत जांच के अनुसार शरीर के किसी भी हिस्से पर चोट के कोई निशान नहीं थे जिसमें प्राइवेट पार्ट भी शामिल था। निजी अंगों से कोई रक्तस्राव नहीं हुआ है, जबकि हल्के खून के धब्बों की मौजूदगी इस बात का सबूत नहीं है कि बच्ची का यौन उत्पीड़न किया गया है। बता दें कि अदालत ने मामले में सुनवाई के पहले दिन के रूप में 1 जून 2019 को निर्धारित किया है।
राहुल मलिक, एसएसपी, बांदीपोरा का कहना है कि, डॉक्टरों को अदालत में जवाब देना होगा। मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि मामला न्यायालय के विचाराधीन है।
मेडिकल रिपोर्ट लीक होने पर स्किम्स निदेशक को नोटिस
जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने मंगलवार को सुंबल दुष्कर्म पीड़ित बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट सोशल मीडिया पर जारी होने के मामले में स्किम्स निदेशक को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि वह पता कर बताएं यह कैसे हुआ।
वकील शफकत नजीर ने याचिकाकर्ता के रूप में अदालत को सूचित किया कि पीड़ित बच्ची के नाम समेत स्किम्स की पूरी मेडिकल रिपोर्ट सोशल मीडिया पर उपलब्ध है जो कि गोपनीयता का उल्लंघन है। मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति राशिद अली डार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद स्किम्स को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई पर इस बारे में पूरी रिपोर्ट पेश करें।