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पाकिस्तान ने घुसपैठ के लिए बंद पड़े रास्तों का किया इस्तेमाल, 60 आतंकियों के घुसपैठ की सूचना

Wed, 18 Sep 2019 12:58 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: Pranjal Dixit Updated Wed, 18 Sep 2019 12:58 PM IST
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militants infiltration in jammu kashmir started from closed tracks and mountains from pok
एलओसी - फोटो : PTI
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद पाकिस्तान की सेना बंद रास्तों का इस्तेमाल करते हुए अब तक लगभग 60 आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर चुकी है। यह आकलन उन खुफिया सूचनाओं के आधार पर है जिनमें कहा गया है कि सीमा पार से उत्तरी कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों तथा जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजोरी इलाकों से घुसपैठ में वृद्धि हुई है। हालांकि, सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ के बारे में सेना की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
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सूत्रों के अनुसार, एलओसी से घुसपैठ के सफल व असफल प्रयासों के आकलन के लिए हाल ही में एक बैठक हुई। इसमें सेना के प्रतिनिधि को कश्मीर क्षेत्र के गुरेज, माछिल और गुलमर्ग सेक्टरों के ऊंचाई वाले इलाकों तथा जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजोरी इलाकों में आतंकी घुसपैठ के संबंध में विभिन्न एजेंसियों द्वारा जुटाए गए सबूत सौंपे।
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डीजीपी दिलबाग सिंह ने पहले कहा था कि एलओसी पर घुसपैठ के अनेक प्रयास हुए जिनमें से ज्यादातर को विफल कर दिया गया। उन्होंने इस संभावना से इंकार नहीं किया था कि हो सकता है कुछ आतंकी घुसपैठ करने में सफल हो गए हों। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।

गुलमर्ग के ऊंचाई वाले क्षेत्रों को 1990 के दशक के शुरू में मध्य कश्मीर में घुसपैठ के लिए इस्तेमाल किया जाता था। वर्ष 2014 में सेना तब आश्चर्यचकित रह गई थी जब उधमपुर में बीएसएफ के वाहन पर आत्मघाती हमले के प्रयास के बाद पकड़े गए आतंकवादी नवीद ने पूछताछ में बताया कि वे गुलमर्ग के ऊंचाई वाले क्षेत्र में उस्ताद पोस्ट से घुसपैठ कर कश्मीर घाटी पहुंचे थे।

अधिकारियों ने कहा कि अब लगता है कि घाटी में घुसपैठ के लिए यही रास्ता अपनाया गया है। इनमें से कुछ लोग बडगाम और पुलवामा के कई हिस्सों में दिखे हैं। आतंकवादियों का एक समूह पाखरपोरा के जरिए पुलवामा पहुंचने से पहले बाबा रेशी पहुंचा। आतंकवादियों का एक अन्य समूह बडगाम जिले में भी पहुंचा है।

हिल काका मार्ग के इस्तेमाल का अंदेशा
अधिकारियों ने यह भी कहा कि इन आतंकवादियों ने भारी गोलाबारी की आड़ में गुरेज, माछिल और तंगधार सेक्टरों से घुसपैठ की। इस घुसपैठ का अहसास तब हुआ जब सुरक्षा एजेंसियों को गांदरबल क्षेत्र में नए चेहरे दिखाई देने लगे। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की एक और बात यह है कि जम्मू के पुंछ क्षेत्र के जरिए छोटे समूह घुसपैठ कर दक्षिण कश्मीर के शोपियां पहुंच गए। शोपियां में प्रवेश के लिए इन्होंने संभवत: हिल काका मार्ग का इस्तेमाल किया। इस रूट का इस्तेमाल वर्ष 2000 से पहले किया जाता था, लेकिन 2003 में सेना की ओर से सर्प विनाश ऑपरेशन के बाद इस रूट का इस्तेमाल बंद हो गया था। ज्यादातर आतंकी इस समय दक्षिणी कश्मीर में दाखिल होने में सफल हो गए हैं। राजोरी के लाम इलाके से भी घुसपैठ करने की कोशिश की गई हैं। यहां से सफल रहने वाले आतंकी पहाड़ी इलाकों से होते हुए दक्षिणी कश्मीर में दाखिल हुए हैं। 
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