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दो महीने तक सूची बनाता रहा प्रशासन, अब बांट रहे राशन
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जम्मू। जिला प्रशासन की ओर से दो माह बाद अब प्रवासी लोगों को राशन वितरित करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। राशन देरी से मिलने पर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। देरी से राशन वितरित करने पर अब लोगों के जेहन में भी कई सवाल हैं, जब जरूरत थी तब राशन मिला नहीं, जब सब सामान्य हो रहा है तब राशन का वितरण शुरू किया गया है।
देर से राशन वितरित होने का सबसे बड़ा कारण विभागों द्वारा समय पर कार्रवाई न करना रहा है। पहले खाद्य आपूर्ति विभाग को राशन वितरित करना था, लेकिन बाद में विभाग इस काम से पीछे हट गया। इसके बाद राशन वितरण की जिम्मेदारी तहसीलदारों को जिम्मेदारी दी गई। तहसीलदार भी अपनी जिम्मेदारी निर्वहन करने में नाकाम रहे। बाद में नगर निगम के पास राशन बांटने की कमान आई तो प्रवासियों की सूची तय नहीं हो पाई। प्रवासियों के नामों की सूची में स्थानीय लोगों के नाम शामिल कर दिए गए। अमर उजाला ने समस्या को उठाया तो डीसी आफिस के माध्यम से राशन वितरित करने का फैसला लिया गया। इस दौरान नए सिरे से सूचियों को तैयार किया गया और अब जाकर राशन वितरण शुरू हो पाया है। तहसीलदार जम्मू विजय सिंह ने बताया कि प्रवासियों को राशन बांटा जा रहा है। पहले सूचियां तय न होने के कारण समस्या आ रही थी।
हजारों लोग कर चुके हैं घरों का रुख
प्रदेश में करीब पचास हजार प्रवासी हैं। इसमें लगभग 12 हजार लोग अपने घरों को जा चुके हैं। वहीं, 15 हजार से ज्यादा प्रवासी जम्मू शहर में रहते हैं। इसमें दो से तीन हजार प्रवासी अपने घरों का रुख कर चुके हैं। शेष बचे लोगाें को अब राशन वितरित होना शुरू हुआ है।
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दो माह का मिला राशन
लोगों को दो माह यानी अप्रैल और मई माह का राशन वितरित किया जा रहा है। प्रति सदस्य पांच किलो चावल और प्रति परिवार एक किलो दाल वितरित की जा रही है।
काम धंधा हो गया ठप, नहीं ली किसी ने सुध
लॉकडाउन के कारण प्रवासियों का काम धंधा ठप हो गया। इस कारण उन्हें जीवन यापन करने में परेशानी होने लगी थी। सब कुछ बंद होने के कारण प्रवासी भूखे रहने को मजबूर थे। इस दौरान जिला प्रशासन ने जरूरतमंद प्रवासियों को राशन आवंटित करने के लिए नामों की सूची मांगी थी।
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देर से राशन वितरित होने का सबसे बड़ा कारण विभागों द्वारा समय पर कार्रवाई न करना रहा है। पहले खाद्य आपूर्ति विभाग को राशन वितरित करना था, लेकिन बाद में विभाग इस काम से पीछे हट गया। इसके बाद राशन वितरण की जिम्मेदारी तहसीलदारों को जिम्मेदारी दी गई। तहसीलदार भी अपनी जिम्मेदारी निर्वहन करने में नाकाम रहे। बाद में नगर निगम के पास राशन बांटने की कमान आई तो प्रवासियों की सूची तय नहीं हो पाई। प्रवासियों के नामों की सूची में स्थानीय लोगों के नाम शामिल कर दिए गए। अमर उजाला ने समस्या को उठाया तो डीसी आफिस के माध्यम से राशन वितरित करने का फैसला लिया गया। इस दौरान नए सिरे से सूचियों को तैयार किया गया और अब जाकर राशन वितरण शुरू हो पाया है। तहसीलदार जम्मू विजय सिंह ने बताया कि प्रवासियों को राशन बांटा जा रहा है। पहले सूचियां तय न होने के कारण समस्या आ रही थी।
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हजारों लोग कर चुके हैं घरों का रुख
प्रदेश में करीब पचास हजार प्रवासी हैं। इसमें लगभग 12 हजार लोग अपने घरों को जा चुके हैं। वहीं, 15 हजार से ज्यादा प्रवासी जम्मू शहर में रहते हैं। इसमें दो से तीन हजार प्रवासी अपने घरों का रुख कर चुके हैं। शेष बचे लोगाें को अब राशन वितरित होना शुरू हुआ है।
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दो माह का मिला राशन
लोगों को दो माह यानी अप्रैल और मई माह का राशन वितरित किया जा रहा है। प्रति सदस्य पांच किलो चावल और प्रति परिवार एक किलो दाल वितरित की जा रही है।
काम धंधा हो गया ठप, नहीं ली किसी ने सुध
लॉकडाउन के कारण प्रवासियों का काम धंधा ठप हो गया। इस कारण उन्हें जीवन यापन करने में परेशानी होने लगी थी। सब कुछ बंद होने के कारण प्रवासी भूखे रहने को मजबूर थे। इस दौरान जिला प्रशासन ने जरूरतमंद प्रवासियों को राशन आवंटित करने के लिए नामों की सूची मांगी थी।