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सरकारी सहायता नहीं, एनजीओ के भरोसे ही चल रहा जीवन
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जम्मू। छतीसगढ़ से मजदूरी करने के लिए कुछ परिवार लॉकडाउन से पहले जम्मू शहर पहुंचे थे। इन मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन से पहले कुछ दिनों तक मजदूरी की, लेकिन लॉकडाउन शुरू होते ही कामधंधा ठप हो गया। इसके चलते जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। सरकार की ओर से राशन मुहैया नहीं कराया गया है। कई बार नाम और पते भी सरकारी बाबूओं ने लिए मगर राशन नहीं दिया।
अब एनजीओ की ओर से जो थोड़ा बहुत राशन मिलता है, उससे कभी एक समय तो कभी दो समय खाने की व्यवस्था हो रही है। एनजीओ पहले तो राशन देती रही मगर बाद में पूछना छोड़ दिया। अब सुबह से ही राशन के जुगाड़ के लिए निकलना पड़ रहा है। कोई मास्क पहना दे रहा है तो कोई हालचाल पूछकर किसी माध्यम से राशन की व्यवस्था करा दे रहा है। छतीसगढ़ के कुमहारी गांव जिला रायगढ़ निवासी धनी राम ने बताया कि भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। उन्हें एनजीओ पर ही आश्रित रहना पड़ रहा है। पहले तो राशन की व्यव्स्था होती रही मगर अब एनजीओ वाले भी कम आ रहे हैं। इससे आगे जीवन कैसे कटेगा इसकी चिंता हो रही है। कुमहारी निवासी देव दास, किशन, जीत और टेकवाई का कहना है कि लॉकडाउन के कारण काम धंधा बंद हो गया है। वापस जाने का भी प्रयास किया जा रहा है। खर्च के लिए पैसे नहीं बचे हैं। पांच सौ रुपये से शहर में कैसे खर्च चलाएंगे।
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अब एनजीओ की ओर से जो थोड़ा बहुत राशन मिलता है, उससे कभी एक समय तो कभी दो समय खाने की व्यवस्था हो रही है। एनजीओ पहले तो राशन देती रही मगर बाद में पूछना छोड़ दिया। अब सुबह से ही राशन के जुगाड़ के लिए निकलना पड़ रहा है। कोई मास्क पहना दे रहा है तो कोई हालचाल पूछकर किसी माध्यम से राशन की व्यवस्था करा दे रहा है। छतीसगढ़ के कुमहारी गांव जिला रायगढ़ निवासी धनी राम ने बताया कि भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। उन्हें एनजीओ पर ही आश्रित रहना पड़ रहा है। पहले तो राशन की व्यव्स्था होती रही मगर अब एनजीओ वाले भी कम आ रहे हैं। इससे आगे जीवन कैसे कटेगा इसकी चिंता हो रही है। कुमहारी निवासी देव दास, किशन, जीत और टेकवाई का कहना है कि लॉकडाउन के कारण काम धंधा बंद हो गया है। वापस जाने का भी प्रयास किया जा रहा है। खर्च के लिए पैसे नहीं बचे हैं। पांच सौ रुपये से शहर में कैसे खर्च चलाएंगे।
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