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उडानों ने ताजा किए पाकिस्तान से लद्दाख को बचाने के लम्हे
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लेह। लॉकडाउन के बीच दो माह बाद लद्दाख में हवाई सेवाओं की बहाली से 7 दशक का इतिहास फिर ताजा हो गया। 24 मई 1948 को बेहद मुश्किल हालात में डकोटा नामक विमान की वो पहली लैंडिंग थी, जिसने लद्दाख को पाकिस्तान के कब्जे में जाने से बचा लिया। लद्दाखी इंजीनियर सोनम नुरबू ने आपात स्थिति में रनवे तैयार किया और डकोटा विमान ने अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा ऊंचाई पर नामुमकिन सी दिखने वाली उड़ान भरने के साथ ही सुरक्षित लैंड भी किया। सोमवार को लेह स्थित कुशोक बकुला रिंपोछे एयरपोर्ट पर दो माह बाद उड़ानें शुरू होने के वक्त एयरपोर्ट प्रशासन ने उन ऐतिहासिक लम्हों को याद करते हुए जांबाजों को याद किया।
एयरपोर्ट अथॉरिटी कार्यालय लेह से मिली जानकारी के अनुसार डकोटा की उड़ान में हवा के दबाव को नियंत्रित करने की व्यवस्था नहीं थी। भारी भरकम ऑक्सीजन सिलिंडर और ठंड से बचने के लिए विशेष कपड़े पहनकर लद्दाख में 24 मई 1948 को पहली उड़ान की लैंडिंग हुई थी। एयर कमोडोर मेहर सिंह और को-पाइलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट एसडी सिंह डकोटा डीसी-3 की उड़ान के साथ 11500 फुट की ऊंचाई पर स्थित लेह पहुंचे थे। 25 हजार फुट की ऊंचाई पर हवाई रूट चार्टर्ड भी नहीं था। तत्कालीन डिव कमांडर मेजर जनरल थिमैया भी इसी उड़ान से लेह पहुंचे थे। यह लम्हे लद्दाख को पाकिस्तान के कब्जे से बचाने में निर्णायक साबित हुए। लेह एयरपोर्ट के डायरेक्टर ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा - आज उड़ानें बहाल हो गई हैं, लेकिन लेह में रनवे तैयार करने वाले इंजीनियर सोनम नुरबू और डकोटा की उस पहली उड़ान को हम सलाम के साथ श्रद्धांजलि देते हैं। इन लम्हों ने लद्दाख को बचाया था।
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एयरपोर्ट अथॉरिटी कार्यालय लेह से मिली जानकारी के अनुसार डकोटा की उड़ान में हवा के दबाव को नियंत्रित करने की व्यवस्था नहीं थी। भारी भरकम ऑक्सीजन सिलिंडर और ठंड से बचने के लिए विशेष कपड़े पहनकर लद्दाख में 24 मई 1948 को पहली उड़ान की लैंडिंग हुई थी। एयर कमोडोर मेहर सिंह और को-पाइलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट एसडी सिंह डकोटा डीसी-3 की उड़ान के साथ 11500 फुट की ऊंचाई पर स्थित लेह पहुंचे थे। 25 हजार फुट की ऊंचाई पर हवाई रूट चार्टर्ड भी नहीं था। तत्कालीन डिव कमांडर मेजर जनरल थिमैया भी इसी उड़ान से लेह पहुंचे थे। यह लम्हे लद्दाख को पाकिस्तान के कब्जे से बचाने में निर्णायक साबित हुए। लेह एयरपोर्ट के डायरेक्टर ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा - आज उड़ानें बहाल हो गई हैं, लेकिन लेह में रनवे तैयार करने वाले इंजीनियर सोनम नुरबू और डकोटा की उस पहली उड़ान को हम सलाम के साथ श्रद्धांजलि देते हैं। इन लम्हों ने लद्दाख को बचाया था।
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