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महबूबा ने साधा केंद्र पर निशाना: कहा जम्मू-कश्मीर को जेल बना रखा है, चैन से जीने दीजिए तभी यहां अमन आएगा

Sun, 27 Jun 2021 06:27 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sun, 27 Jun 2021 06:27 PM IST
सार

महबूबा का कहना है कि पूरा जम्मू-कश्मीर राज्य और मैं इसे केवल एक ऐसा राज्य कहेंगे, जो जेल बन गया है।

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Mehbooba targeted the Center: Said Jammu and Kashmir has been made a jail, let it live peacefully only then peace will come here
महबूबा मुफ्ती

विस्तार

जम्मू-कश्मीर की पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई संवाद की प्रक्रिया को तभी विश्वसनीयता मिल सकती है जब असहमति रखना कोई आपराधिक काम नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में दमनकारी युग को समाप्त होना चाहिए। साथ ही उनका कहना था कि 'लोगों को चैन से जीने का अधिकार दिया जाए, प्रदेश में अमन उसके बाद आएगा।

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उन्होंने जम्मू-कश्मीर के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की जनता की 'दुश्वारियों' के अंत की दिशा में एक कदम बताया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहीं महबूबा ने स्पष्ट किया कि संवाद प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाना केंद्र के हाथ में है। उन्होंने कहा कि केंद्र को 'लोगों को चैन से जीने' देना चाहिए। साथ ही जम्मू-कश्मीर के लोगों की नौकरियों और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
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महबूबा ने बताया कि 'लोगों को चैन से जीने देने से उनका मतलब है कि आज किसी भी फैसले पर असहमति रखने वाले को जेल में डाले जाने का खतरा रहता है। हाल ही में एक व्यक्ति को अपने भाव प्रकट करने के लिए जेल में डाल दिया गया। जिसने कहा था कि उसे कश्मीरी सलाहकार से बहुत उम्मीदें थीं। संबंधित उपायुक्त ने यह सुनिश्चित किया कि उसे अदालत से जमानत मिलने के बावजूद कुछ दिन जेल में रखा जाए।
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महबूबा ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह 'दिल की दूरी' मिटाना चाहते हैं तो इस तरह के दमन का तत्काल अंत हो जाना चाहिए। गौरतलब है कि ऐतिहासिक बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर की जनता को दिल्ली के करीब लाने के लिए 'दिल्ली की दूरी' के साथ-साथ 'दिल की दूरी' मिटाना चाहते हैं।

पीडीपी प्रमुख ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के अवाम के साथ दिल की दूरी कम करने के लिए सभी काले कानूनों को पारित करना बंद करना होगा। नौकरियों और भूमि अधिकारों की रक्षा करना होगी। उन्होंने कहा, 'पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि इस दमनकारी युग का अंत होना चाहिए और सरकार को यह समझना चाहिए कि अस्वीकृति प्रकट करना आपराधिक कृत्य नहीं है। पूरा जम्मू-कश्मीर राज्य और मैं इसे केवल एक ऐसा राज्य कहेंगे, जो जेल बन गया है।

महबूबा ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में हुई बैठक में केवल केंद्रीय नेताओं को लोगों की समस्याओं से अवगत कराने के लिए हिस्सा लिया। उन्होंने कहा, 'मैं किसी भी सत्ता की राजनीति के लिए नहीं आई हूं क्योंकि मेरा रुख स्पष्ट है कि मैं जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा वापस मिलने तक कोई चुनाव नहीं लडूंगी।'

उन्होंने कहा, 'चूंकि निमंत्रण प्रधानमंत्री की ओर से आया था, इसलिए मैंने इसे 5 अगस्त, 2019 के बाद लोगों की पीड़ा को उजागर करने के अवसर के रूप में लिया, जब अनुच्छेद 370 को खत्म कर राज्य को असंवैधानिक रूप से विभाजित कर दिया गया था। महबूबा ने दोहराया कि जब तक जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा वापस नहीं दिया जाता, तब तक वह चुनाव नहीं लड़ेंगी।

उन्होंने कहा, 'मैंने कई बार स्पष्ट किया है कि मैं केंद्र शासित प्रदेश के तहत कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, लेकिन साथ ही मेरी पार्टी इस बात से भी वाकिफ है कि हम किसी को अपना राजनीतिक स्थान नहीं देंगे। हमने पिछले साल हुए जिला विकास परिषद का चुनाव लड़ा था। इसी तरह, यदि विधानसभा चुनाव की घोषणा की जाती है तो हमारी पार्टी इस पर बैठ कर विचार करेगी।

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