हर घर को मिले हैं जख्म, हीलिंग टच देगी सरकार: महबूबा
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पिछले 27 बरस से चली आ रही हिंसा ने घाटी के हर घर को जख्म दिए हैं। इन जख्मों को मरहम की जरूरत है जिसके लिए सरकार की ओर से हीलिंग टच दिया जाएगा। पीड़ित परिवारों तक पहुंचना और उन्हें हीलिंग टच देना सरकार की प्राथमिकता है। इसमें युवाओं को खास तवज्जो दी जाएगी।
नौहट्टा क्षेत्र के नक्शबंद साहब में स्थित कब्रगाह में शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने पहुंची महबूबा ने कहा कि हिंसा की ताजा घटनाओं ने जो गम और सदमे दिए हैं उससे दिल भर आया है। सभी को मिलकर जम्मू कश्मीर को हिंसा और खूनखराबे के दौर से बाहर निकालने के लिए हाथ बंटाना होगा।
रियासत में आर्थिक आत्मनिर्भरता लाने के साथ-साथ राजनीतिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के सपने को साकार करने के लिए उन्हें अवाम से समर्थन की जरूरत है। वे किसी भी सूरत में अवाम की उम्मीदों को निराश नहीं करेंगीं।
शहीदी दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि 13 जुलाई 1931 में अपनी कुर्बानी देने वालों ने रियासत में लोकतंत्र की नींव रखी। जम्मू कश्मीर के इतिहास में कई मर्तबा विशेष परिस्थितियां सामने आई हैं। आज के हालात भी विशेष हैं जिसे चुनौती समझकर उनका सामना करना होगा। इस अवसर पर राज्य मंत्रिमंडल के कई सदस्य भी मौजूद थे।
बेशर्मी से हालात को सामान्य बता रहीं महबूबा : उमर
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि महबूबा बेशर्मी के साथ घाटी के हालात को सामान्य बताने का प्रयास कर रही हैं। शहीदी दिवस कार्यक्रम का जिक्र करते हुए उमर ने ट्वीट किया कि सरकार पुलिस की बसों में ढोकर लोगाें को आयोजन स्थल तक लाई। ऐसा करने के पीछे हालात सामान्य होने का संदेश देना था।
उमर ने कहा कि 30 से अधिक लोगाें की जान जा चुकी है लेकिन महबूबा और उनकी पार्टी केवल अपनी पार्टी के झंडे को उठाए रखकर आपत्तिजनक तरीके से लोगों की हिस्सेदारी करवा रही हैं। जमीनी हकीकत से हटकर वे दिल्ली में बैठे आकाओं को मूर्ख बना रही हैं।
12 सौ से ज्यादा लोग अस्पतालों में हैं जिनका उपचार देने के लिए डाक्टर संघर्ष कर रहे हैं। ट्वीट में प्रधानमंत्री से अपील करते हुए उमर ने लिखा कि केरल में आग की घटना के बाद आपने बर्न स्पेशलिस्ट डाक्टरों को जहाज के जरिये भेजा था। कृपया कश्मीर में आई एंड ट्रामा विशेषज्ञों को भेजें।
इससे पूर्व उमर ने श्रीनगर के शहीदी स्थल पर मीडिया से बातचीत में कहा राज्य सरकार ने वर्ष 2008 और 2010 में घाटी के हालात से कोई सबक नहीं लिया। बुरहान की मौत के असर का या तो सरकार आंकलन नहीं कर पाई या फिर तैयारी नहीं कर पाई।