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कश्मीर मसले पर पाक और सभी समूहों से हो बातचीत : महबूबा
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Tue, 16 Aug 2016 08:47 PM IST
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महबूबा मुफ्ती
- फोटो : File Photo
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर से जुड़े तमाम मसलों के स्थायी हल के लिए भारत और पाकिस्तान से करीबियां बढ़ाने की अपील की है।
श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचीं महबूबा ने कहा कि बातचीत में हर वर्ग को शामिल किया जाना चाहिए। स्थायी हल का मतलब क्षेत्रीय, सरहदी और घरेलू विवादों का निपटारा है, जिसके लिए हमें अब और देरी नहीं करनी चाहिए।
महबूबा ने कहा, सार्क सम्मेलन में पाकिस्तान ने अमन बहाली के लिए संवाद का अवसर खो दिया। पाकिस्तान यदि कश्मीर से प्यार करता है तो उसे भारत के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर और पीओके को साथ लाकर सार्क एकता की मिसाल कायम करनी होगी। दोनाें मुल्कों से अपील है कि वे अब करीब आएं। सरहदाें को खोलकर दोनों तरफ की अवाम का मेल मुलाकात बढ़ने दें।
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श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचीं महबूबा ने कहा कि बातचीत में हर वर्ग को शामिल किया जाना चाहिए। स्थायी हल का मतलब क्षेत्रीय, सरहदी और घरेलू विवादों का निपटारा है, जिसके लिए हमें अब और देरी नहीं करनी चाहिए।
महबूबा ने कहा, सार्क सम्मेलन में पाकिस्तान ने अमन बहाली के लिए संवाद का अवसर खो दिया। पाकिस्तान यदि कश्मीर से प्यार करता है तो उसे भारत के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर और पीओके को साथ लाकर सार्क एकता की मिसाल कायम करनी होगी। दोनाें मुल्कों से अपील है कि वे अब करीब आएं। सरहदाें को खोलकर दोनों तरफ की अवाम का मेल मुलाकात बढ़ने दें।
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'युवाओं की मौत कर रही विचलित'
सीएम महबूबा मुफ्ती और डिप्टी सीएम निर्मल सिंह
- फोटो : Amar Ujala
घाटी की हिंसा का जिक्र करते हुए महबूबा ने कहा कि युवाओं की मौतें विचलित कर रही हैं। कश्मीर के प्रतिभाशाली युवाओं को वह सेंट्रल जेल के बजाय सेंट्रल युनिवर्सिटी में देखना चाहती हैं। कुछ लोग युवओं को ढाल बनाकर पत्थरबाजी कर हिंसा भड़का रहे हैं।
महबूबा ने कहा न तो केंद्र सरकार गलत है और न ही कश्मीर की अवाम। गलती असल में पिछली सरकारों से हुई है, जिसका खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है। वर्ष 2008 और 2010 के हालात पर कई डेलीगेशन आए, लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकाले जा सके।
कश्मीर मसले पर परिणामोन्मुखी संवाद की जरूरत है, ताकि हर पांच और दस साल के बाद हिंसक माहौल के पुनरावृत्ति चक्र को रोका जा सके। महबूबा ने कहा, वर्तमान में कश्मीर के हालात देखकर बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावक पलायन कर रहे हैं। वे अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए शिफ्ट हो रहे हैं।
महबूबा ने कहा न तो केंद्र सरकार गलत है और न ही कश्मीर की अवाम। गलती असल में पिछली सरकारों से हुई है, जिसका खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है। वर्ष 2008 और 2010 के हालात पर कई डेलीगेशन आए, लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकाले जा सके।
कश्मीर मसले पर परिणामोन्मुखी संवाद की जरूरत है, ताकि हर पांच और दस साल के बाद हिंसक माहौल के पुनरावृत्ति चक्र को रोका जा सके। महबूबा ने कहा, वर्तमान में कश्मीर के हालात देखकर बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावक पलायन कर रहे हैं। वे अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए शिफ्ट हो रहे हैं।