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सीजफायर पर बोलीं मुख्यमंत्री महबूबा, कहा- अब पाक को करनी होगी बातचीत की पहल
ब्यूरो, अमर उजाला/उधमपुर
Updated Fri, 28 Oct 2016 10:04 PM IST
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कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री
- फोटो : Amar Ujala
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रियासत में तनाव खत्म करने के लिए पाकिस्तान की पहल पर जोर दिया है।
महबूबा ने कहा भारत के प्रधानमंत्री दोस्ताना रिश्ते बनाने के लिए खास पहल कर चुके हैं जो एक मौका था, लेकिन पाक ने इसे गंवा दिया। अब पाकिस्तान की बारी है।
सरहद पर गोलाबारी स्थायी रूप से नहीं रह सकती, आज नहीं तो कल संघर्ष विराम का महत्व समझना ही पड़ेगा। महबूबा उधमपुर स्थित शेरे कश्मीर पुलिस अकेडमी में पासिंग आउट परेड क ो बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
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महबूबा ने कहा भारत के प्रधानमंत्री दोस्ताना रिश्ते बनाने के लिए खास पहल कर चुके हैं जो एक मौका था, लेकिन पाक ने इसे गंवा दिया। अब पाकिस्तान की बारी है।
सरहद पर गोलाबारी स्थायी रूप से नहीं रह सकती, आज नहीं तो कल संघर्ष विराम का महत्व समझना ही पड़ेगा। महबूबा उधमपुर स्थित शेरे कश्मीर पुलिस अकेडमी में पासिंग आउट परेड क ो बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
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'अनपढ़ बच्चों को दी जा रही पत्थरबाजी की तालीम'
सीएम महबूबा मुफ्ती
- फोटो : PTI
उन्हाेंने कहा घाटी में कुछ नेता अनपढ़ बच्चों को पत्थरबाजी की तालीम दे रहे हैं। ये लोग बच्चाें के दिमाग से खेलकर सुरक्षा बलाें पर हमले करवा रहे हैं। घाटी में दस से पंद्रह साल की उम्र के बच्चों के हाथ में पत्थर पकड़ा कर उनका सुरक्षा बलों से टकराव कराया जा रहा है।
ज्यादातर गरीब तबके के इन बच्चों को ही मौत के मुंह में छोड़कर अपनी सियासत की जा रही है। घाटी में अब स्कूलाें को जलाया जा रहा है। दिल्ली से आया सिविल सोसायटी का डेलीगेशन अलगाववादियों से मिला लेकिन उसके दूसरे ही दिन दो स्कूल जला दिए।
मानवाधिकार हनन के आरोपाें का जिक्र करते हुए महबूबा ने कहा कि रियासत में उनसे बड़ा कोई मानवाधिकार कार्यकर्ता नहीं है। वे फुसबुक पर नहीं बैठतीं और ना ही फोटो अपलोड करती हैं। कुछ लोग जब ताजा फोटो न मिलें तो पुराने ही अपलोड कर देते हैं। महबूबा ने कहा कि जब भी कोई मानवीय त्रासदी होती है तो सबसे पहले मौके पर पहुंचकर गलत के खिलाफ आवाज उठाती हैं।
ज्यादातर गरीब तबके के इन बच्चों को ही मौत के मुंह में छोड़कर अपनी सियासत की जा रही है। घाटी में अब स्कूलाें को जलाया जा रहा है। दिल्ली से आया सिविल सोसायटी का डेलीगेशन अलगाववादियों से मिला लेकिन उसके दूसरे ही दिन दो स्कूल जला दिए।
मानवाधिकार हनन के आरोपाें का जिक्र करते हुए महबूबा ने कहा कि रियासत में उनसे बड़ा कोई मानवाधिकार कार्यकर्ता नहीं है। वे फुसबुक पर नहीं बैठतीं और ना ही फोटो अपलोड करती हैं। कुछ लोग जब ताजा फोटो न मिलें तो पुराने ही अपलोड कर देते हैं। महबूबा ने कहा कि जब भी कोई मानवीय त्रासदी होती है तो सबसे पहले मौके पर पहुंचकर गलत के खिलाफ आवाज उठाती हैं।